शनिवार, 7 नवम्बर 2026 · नई दिल्ली
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पूर्व क्रिकेटर मिथुन मन्हास को उम्र धोखाधड़ी मामले में राहत, जम्मू कोर्ट ने FIR की अर्जी खारिज की

जम्मू की एक अदालत ने पूर्व क्रिकेटर और बीसीसीआई अध्यक्ष मिथुन मन्हास के खिलाफ उम्र में धोखाधड़ी के आरोपों पर FIR दर्ज करने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने पाया कि पहली नजर में ऐसा कोई…

पूर्व क्रिकेटर मिथुन मन्हास को उम्र धोखाधड़ी मामले में राहत, जम्मू कोर्ट ने FIR की अर्जी खारिज की
(फोटो: IANS)

जम्मू की एक अदालत ने पूर्व क्रिकेटर और बीसीसीआई अध्यक्ष मिथुन मन्हास के खिलाफ उम्र में धोखाधड़ी के आरोपों पर FIR दर्ज करने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने पाया कि पहली नजर में ऐसा कोई सबूत नहीं है जिससे यह साबित हो कि मन्हास ने जूनियर क्रिकेट में फायदा उठाने के लिए कोई जाली दस्तावेज़ तैयार किया या झूठा बयान दिया।

यह मामला तब शुरू हुआ जब जम्मू-कश्मीर क्रिकेट एसोसिएशन (JKCA) के पूर्व संयुक्त सचिव सुदर्शन मेहता ने अगस्त में एक अर्जी दायर की थी। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, मेहता ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 175(3) के तहत यह याचिका दी थी। उन्होंने मन्हास पर धोखाधड़ी और जालसाजी का आरोप लगाते हुए दावा किया कि दिल्ली के इस पूर्व बल्लेबाज ने दो अलग-अलग जन्मतिथियों का इस्तेमाल किया था।

क्या थे धोखाधड़ी के आरोप?

याचिकाकर्ता सुदर्शन मेहता, जो एक रिटायर्ड सीनियर डिप्टी सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस भी हैं, ने आरोप लगाया कि मन्हास ने राष्ट्रीय सब-जूनियर और जूनियर टूर्नामेंट में चयन पाने के लिए अपनी उम्र के साथ हेरफेर किया। उन्होंने महाराजा हरि सिंह एग्रीकल्चर कॉलेजिएट (एमएचएसी) स्कूल, नागबनी से मिले एक ईमेल का हवाला दिया, जिसमें मन्हास की जन्मतिथि 9 दिसंबर, 1977 बताई गई थी। वहीं, दिल्ली एंड डिस्ट्रिक्ट क्रिकेट एसोसिएशन (डीडीसीए) की वेबसाइट पर उनकी जन्मतिथि 12 अक्टूबर, 1979 दर्ज थी। मेहता ने कहा कि पहले उन्होंने नोवाबाद पुलिस स्टेशन और जम्मू के एसपी सिटी नॉर्थ से शिकायत की थी, लेकिन कोई कार्रवाई न होने पर उन्हें अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ा।

पुलिस जांच और अदालत का फैसला

शिकायत के बाद, स्पेशल रेलवे मजिस्ट्रेट संदीप सिंह सेन की अदालत ने नोवाबाद पुलिस स्टेशन से तथ्यात्मक रिपोर्ट मांगी। पुलिस जांच में जालसाजी के आरोप साबित नहीं हो सके। जांच में पाया गया कि मन्हास की सीबीएसई मार्कशीट, पैन कार्ड, आधार कार्ड और उनके नियोक्ता ओएनजीसी के रिकॉर्ड में जन्मतिथि एक समान 12 सितंबर, 1977 दर्ज थी। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि कथित गड़बड़ी से मन्हास को जूनियर क्रिकेट में कोई अनुचित लाभ नहीं मिला।

अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि शिकायतकर्ता ने ज्यादातर डीडीसीए वेबसाइट की जानकारी की फोटोकॉपी पर भरोसा किया, लेकिन कोई मूल या प्रमाणित दस्तावेज़ पेश नहीं किया। कोर्ट ने कहा, "यह बताना जरूरी है कि सिर्फ दो एंट्री में गड़बड़ी, और कुछ नहीं, अपने आप में जालसाजी या मनगढ़ंत कहानी का नतीजा नहीं निकाल सकती।" अदालत ने यह भी कहा कि वेबसाइट की सामग्री को उम्र या जालसाजी का पक्का सबूत नहीं माना जा सकता और याचिका को कमजोर पाते हुए खारिज कर दिया।

इनपुट: IANS

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