भारतीय फुटबॉल को कैसे मिलेगी नई दिशा? बाइचुंग भूटिया ने बताया ग्रासरूट से बदलाव का रोडमैप
भारतीय फुटबॉल के दिग्गज और पूर्व कप्तान बाइचुंग भूटिया का मानना है कि देश में इस खेल का भविष्य उज्ज्वल हो सकता है, लेकिन इसके लिए जमीनी स्तर पर बड़े बदलावों की ज़रूरत है। उन्होंने कुरासाओ और काबो…
भारतीय फुटबॉल के दिग्गज और पूर्व कप्तान बाइचुंग भूटिया का मानना है कि देश में इस खेल का भविष्य उज्ज्वल हो सकता है, लेकिन इसके लिए जमीनी स्तर पर बड़े बदलावों की ज़रूरत है। उन्होंने कुरासाओ और काबो वर्डे जैसे छोटे देशों का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत को उनसे सीखने की जरूरत है, जो कम आबादी के बावजूद लगातार बेहतरीन खिलाड़ी तैयार कर रहे हैं।
सिलीगुड़ी में मीडिया से बातचीत के दौरान, समाचार एजेंसी IANS के हवाले से भूटिया ने कहा कि इन देशों की सफलता के पीछे एक मजबूत ग्रासरूट ढांचा, लंबी अवधि की योजना और युवा प्रतिभाओं में लगातार निवेश है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अगर भारत में भी योजनाबद्ध तरीके से काम किया जाए, तो भारतीय फुटबॉल नई ऊंचाइयों पर पहुंच सकता है।
नई सरकार से उम्मीदें
भूटिया ने भारतीय फुटबॉल में सकारात्मक बदलाव की उम्मीद जताते हुए कहा कि नई सरकार और संबंधित संस्थाओं को पर्याप्त समय दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, "नई सरकार कई महत्वपूर्ण बदलाव करने की दिशा में काम करेगी और खिलाड़ियों तथा खेलों के हित में फैसले लिए जाएंगे। हमें नई सरकार को समय देना चाहिए। हम खिलाड़ियों की हर संभव मदद करने के लिए तैयार हैं।"
राज्य संघों की भूमिका
पूर्व कप्तान ने भारतीय फुटबॉल संघ (आईएफए) को अपनी गतिविधियों का विस्तार करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि संघ को सिर्फ कोलकाता तक ही सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि पूरे राज्य, खासकर हर जिले में फुटबॉल के विकास पर समान रूप से ध्यान देना होगा। भूटिया के अनुसार, उत्तर बंगाल में कई प्रतिभाशाली खिलाड़ी हैं जिन्हें सही अवसर और बेहतर सुविधाएं मिलनी चाहिए।
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 पर चिंता
आगामी कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 पर अपनी राय रखते हुए भूटिया ने कहा कि इस बार खेलों की संख्या सीमित होने से भारत की पदक संभावनाओं पर असर पड़ेगा। उन्होंने चिंता जताई कि कुश्ती जैसे खेलों के शामिल न होने से भारतीय दल को पदकों का नुकसान हो सकता है, क्योंकि भारत को इन खेलों में हमेशा पदक की अच्छी उम्मीद रहती है।
इनपुट: IANS


