सॉफ्टवेयर डेवलपर से एशियन पैरा गेम्स के पोडियम तक: प्राची पांडे ने टेबल टेनिस में जीता ऐतिहासिक कांस्य
सॉफ्टवेयर डेवलपर के रूप में तीन साल काम करने के बाद खेल को अपना करियर बनाने वाली प्राची पांडे ने भारत के लिए एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। जापान के आइची-नागोया में चल रहे एशियन पैरा गेम्स 2026 में…
सॉफ्टवेयर डेवलपर के रूप में तीन साल काम करने के बाद खेल को अपना करियर बनाने वाली प्राची पांडे ने भारत के लिए एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। जापान के आइची-नागोया में चल रहे एशियन पैरा गेम्स 2026 में उन्होंने पैरा टेबल टेनिस की महिला एकल क्लास 9 स्पर्धा में कांस्य पदक जीता है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, इस स्पर्धा में यह भारत का पहला पदक है, जो प्राची के दृढ़ संकल्प और प्रतिभा को दर्शाता है।
15 जनवरी 1993 को उत्तर प्रदेश में जन्मी प्राची ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है और चंडीगढ़ के पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज (पीईसी) से एम.टेक की डिग्री हासिल की है। खेल को पूरी तरह अपनाने से पहले, वह 2020 से 2023 तक एक फुल-स्टैक सॉफ्टवेयर डेवलपर के तौर पर काम कर रही थीं। एक न्यूरोडीजेनेरेटिव स्थिति से जूझने के बावजूद उन्होंने इन चुनौतियों को कभी अपने रास्ते की बाधा नहीं बनने दिया।
शानदार मुकाबला और बड़ी जीत
विश्व रैंकिंग में 17वें स्थान पर काबिज प्राची का सेमीफाइनल में मुकाबला इराक की नजला अल-दाय्येनी से था, जो विश्व में 5वें स्थान पर हैं और मौजूदा पैरालंपिक व एशियन पैरा गेम्स चैंपियन भी हैं। एक मजबूत प्रतिद्वंद्वी के खिलाफ कांस्य पदक जीतना भारतीय पैरा टेबल टेनिस के लिए एक महत्वपूर्ण क्षण है। प्राची 'महिला एकल क्लास 9' श्रेणी में प्रतिस्पर्धा करती हैं, जो गंभीर शारीरिक अक्षमता वाले खिलाड़ियों के लिए एक 'स्टैंडिंग' (खड़े होकर खेलने वाली) श्रेणी है।
उपलब्धियों से भरा करियर
यह सफलता प्राची के शानदार प्रदर्शन की एक और कड़ी है। उन्होंने 2022 और 2023 में लगातार दो बार नेशनल पैरा टेबल टेनिस चैंपियनशिप में महिला एकल का खिताब जीता था। इसके अलावा, उन्होंने दिसंबर 2023 में पहले खेलो इंडिया पैरा गेम्स और फिर 2025 के संस्करण में भी स्वर्ण पदक अपने नाम किया। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उनका प्रदर्शन दमदार रहा है। प्राची ने अब तक आईटीटीएफ रैंकिंग टूर्नामेंटों में कुल 12 पदक जीते हैं, जिनमें चार रजत और आठ कांस्य पदक शामिल हैं।
गांधीनगर स्थित साई नेशनल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (NCOE) और 'खेलो इंडिया' कार्यक्रम की एथलीट होने के नाते उन्हें लगातार संस्थागत समर्थन मिलता रहा है। एशियन पैरा गेम्स 2026 के दौरान, 'एनुअल कैलेंडर फॉर ट्रेनिंग एंड कॉम्पिटिशन' (एसीटीसी) के तहत उन्हें ₹26,86,099 की वित्तीय सहायता भी प्रदान की गई थी।
इनपुट: IANS


