खेल में महिला शक्ति: NCW की नई पहल 'खेल शक्ति' एथलीट्स की चुनौतियों पर करेगी मंथन
भारत की महिला एथलीटों ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर लगातार देश का नाम रोशन किया है, लेकिन खेल के मैदान से परे उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। इन्हीं मुद्दों के समाधान के लिए…
भारत की महिला एथलीटों ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर लगातार देश का नाम रोशन किया है, लेकिन खेल के मैदान से परे उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। इन्हीं मुद्दों के समाधान के लिए राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, NCW युवा मामले और खेल मंत्रालय के सहयोग से मंगलवार को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में 'खेल शक्ति: खेल में महिलाओं के लिए राष्ट्रीय परामर्श' का आयोजन करेगा।
इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य महिला एथलीटों के सामने आने वाली बाधाओं पर चर्चा करना और उनके लिए एक सुरक्षित व सहायक माहौल बनाने के उपायों की पहचान करना है। इस महत्वपूर्ण आयोजन में युवा मामले और खेल राज्य मंत्री रक्षा खडसे मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल होंगी। उनके साथ राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष विजया राहटकर भी मौजूद रहेंगी। उनकी उपस्थिति खेल में महिलाओं की भागीदारी, सुरक्षा और नेतृत्व को बढ़ावा देने की संस्थागत प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
चर्चा के मुख्य केंद्र बिंदु
यह राष्ट्रीय परामर्श तीन प्रमुख विषयों पर केंद्रित होगा। पहला, जमीनी स्तर पर खेल के माहौल को मजबूत कर महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना। दूसरा, खेल के क्षेत्र में एक सुरक्षित, स्वस्थ और सहायक वातावरण सुनिश्चित करना। और तीसरा, खेल में समानता, करियर की निरंतरता और महिलाओं के नेतृत्व को प्रोत्साहन देना है। चर्चा का जोर व्यवस्थागत बाधाओं को दूर करने और महिला खिलाड़ियों को उनके पूरे करियर के दौरान संस्थागत समर्थन देने पर रहेगा।
कौन-कौन होंगे शामिल?
'खेल शक्ति' कार्यक्रम खेल जगत से जुड़े सभी प्रमुख हितधारकों को एक मंच पर लाएगा। इसमें मौजूदा एथलीट्स, ओलंपियन, कोच, खेल प्रशासक, राष्ट्रीय खेल महासंघों के प्रतिनिधि, भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) के अधिकारी, चिकित्सा और खेल विज्ञान विशेषज्ञ, शिक्षाविद और महिला एथलीटों के अभिभावक शामिल होंगे। ये सभी मिलकर व्यावहारिक और लागू करने योग्य सुझाव तैयार करेंगे।
सिर्फ भागीदारी नहीं, निरंतरता है लक्ष्य
आयोग का मानना है कि महिला एथलीटों को सिर्फ खेल के अवसर देना ही काफी नहीं है। बल्कि उन्हें पोषण, स्वास्थ्य सेवा, सुरक्षा, सम्मान, मानसिक स्वास्थ्य, बेहतर बुनियादी ढांचा, उचित पारिश्रमिक, मातृत्व सुरक्षा और खेल प्रशासन में प्रतिनिधित्व जैसी चुनौतियों से निपटने में भी मदद की जरूरत है। इस पहल के जरिए NCW का लक्ष्य चर्चा को 'सिर्फ भागीदारी' से 'निरंतर भागीदारी' तक और 'व्यक्तिगत उपलब्धियों' से 'खिलाड़ियों के कल्याण' तक ले जाना है, ताकि एक ऐसा इकोसिस्टम बने जहां महिलाएं सम्मान और समान अवसर के साथ अपने सपने पूरे कर सकें।
इनपुट: IANS


