शनिवार, 1 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
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विवादों में घिरे एंड्रिया पिर्लो इटली के कोच पद की रेस से बाहर, रूसी सट्टेबाजी कंपनी से जुड़ाव बना वजह

इटली के महान फुटबॉलर और विश्व कप विजेता एंड्रिया पिर्लो अब अपनी राष्ट्रीय टीम के कोच नहीं बन पाएंगे। एक रूसी सट्टेबाजी कंपनी के साथ उनके कमर्शियल संबंधों को लेकर उठे विवाद के बाद उन्हें इस दौड़ से…

विवादों में घिरे एंड्रिया पिर्लो इटली के कोच पद की रेस से बाहर, रूसी सट्टेबाजी कंपनी से जुड़ाव बना वजह
(फोटो: IANS)

इटली के महान फुटबॉलर और विश्व कप विजेता एंड्रिया पिर्लो अब अपनी राष्ट्रीय टीम के कोच नहीं बन पाएंगे। एक रूसी सट्टेबाजी कंपनी के साथ उनके कमर्शियल संबंधों को लेकर उठे विवाद के बाद उन्हें इस दौड़ से बाहर कर दिया गया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, पेप गार्डियोला के इनकार के बाद 47 वर्षीय पिर्लो को जेनारो गैटुसो की जगह लेने के लिए सबसे प्रबल दावेदारों में से एक माना जा रहा था।

हालांकि, रूसी बेटिंग कंपनी 'फोनबेट' के ग्लोबल एंबेसडर के रूप में उनकी भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो गए। इस जुड़ाव को लेकर इटालियन फुटबॉल फेडरेशन (एफआईजीसी) के अधिकारियों और कई सांसदों ने कड़ी आपत्ति जताई थी, जिसके बाद यह फैसला लिया गया। पिर्लो वर्तमान में दुबई की यूएई प्रो लीग में यूनाइटेड एफसी के मैनेजर हैं।

पिर्लो ने इंस्टाग्राम पर दी सफाई

सोमवार को इस मामले पर अपनी चुप्पी तोड़ते हुए एंड्रिया पिर्लो ने इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट के जरिए अपनी निराशा जाहिर की और अपना पक्ष रखा। उन्होंने लिखा, "कल रात यह जानने के बाद कि मैं अब इटली की नेशनल टीम का नेतृत्व करने के लिए उम्मीदवार नहीं हूं, कुछ बातों को स्पष्ट करना मेरा कर्तव्य है।" उन्होंने कहा कि पिछले कुछ दिनों से अपने नाम को लेकर चल रही बहस से उन्हें "बहुत दुख" हुआ है।

पिर्लो ने अपने पेशेवर रवैये का बचाव करते हुए कहा, "अपने पूरे करियर में, पहले एक खिलाड़ी के तौर पर और अब एक कोच के तौर पर, मैंने हमेशा उन देशों के कानूनों और साइन किए गए कॉन्ट्रैक्ट्स का पूरी तरह पालन करते हुए अपना काम किया है, जहां मैंने काम किया है।" उन्होंने बताया कि फोनबेट के साथ उनका समझौता अक्टूबर में हुआ था और यह पूरी तरह से कमर्शियल था, जिसे राजनीतिक रंग दिया जा रहा है।

कैसे बढ़ा था पूरा विवाद?

यह विवाद तब और गहरा गया जब पिर्लो, अपने पूर्व साथी खिलाड़ी मार्को माटेराजी के साथ मॉस्को के लुझनिकी स्टेडियम में फोनबेट द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में शामिल हुए। यूक्रेन में रूस के जारी युद्ध के बीच इस कदम की काफी आलोचना हुई थी। हालांकि, पिर्लो को इटली में रूस के राजदूत एलेक्सी पैरामो नोव का सार्वजनिक समर्थन भी मिला, जिन्होंने इस आलोचना की निंदा की थी।

अब पिर्लो के दौड़ से हटने के बाद इटली के लिए नए कोच की तलाश तेज हो गई है। इटालियन फुटबॉल महासंघ (एफआईजीसी) के नए तकनीकी निदेशक पाओलो माल्डिनी इस नियुक्ति प्रक्रिया का नेतृत्व कर रहे हैं। नए कोच के सामने सबसे बड़ी चुनौती इटली को फीफा विश्व कप 2030 के लिए क्वालिफाई कराने की होगी, क्योंकि टीम लगातार पिछले तीन विश्व कप में जगह बनाने में नाकाम रही है।

इनपुट: IANS

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News4Social स्पोर्ट्स डेस्क

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