पिता का अधूरा सपना, बेटी समायरा की WPL में एंट्री: 16 साल की उम्र में गुजरात जायंट्स ने 10 लाख में खरीदा
16 साल की समायरा राघव को महिला प्रीमियर लीग (WPL) ऑक्शन में गुजरात जायंट्स ने 10 लाख रुपये की बेस प्राइस पर खरीदकर उनके नौ साल पुराने सपने को पहली उड़ान दी है। दिलचस्प बात यह है कि समायरा और उनके…
16 साल की समायरा राघव को महिला प्रीमियर लीग (WPL) ऑक्शन में गुजरात जायंट्स ने 10 लाख रुपये की बेस प्राइस पर खरीदकर उनके नौ साल पुराने सपने को पहली उड़ान दी है। दिलचस्प बात यह है कि समायरा और उनके माता-पिता ने ऑक्शन की लाइव कवरेज न देखने का फैसला किया था, उन्हें डर था कि अगर कोई टीम उन्हें नहीं चुनती तो इस कम उम्र में निराशा संभालना मुश्किल होगा। समाचार एजेंसी IANS के साथ एक विशेष बातचीत में समायरा ने उस रोमांचक पल को साझा किया जब उन्होंने अपना नाम ऑक्शन में आते देखा।
वह उस वक्त हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर में अंडर-19 महिला टी20 चैलेंजर्स टूर्नामेंट के लिए अपने होटल के कमरे में थीं। समायरा ने बताया, "मैंने अपने नाम के साथ गुजरात जायंट्स का पैडल ऊपर उठते हुए देखा, जिसके बाद मेरी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। हम दोनों (रूममेट) ने होटल के कमरे में जोर-जोर से चिल्लाना शुरू कर दिया। वह पल बिल्कुल किसी सपने जैसा था।" असल में, ऑक्शन से ठीक एक दिन पहले उन्हें आखिरी समय में ऑक्शन पूल में शामिल किए गए चार खिलाड़ियों में जगह मिली थी, जिससे उनकी उम्मीदें जगी थीं।
पिता के सपने से क्रिकेट तक का सफर
23 जनवरी 2010 को जन्मीं समायरा ने अपने खेल करियर की शुरुआत एथलेटिक्स (100 और 200 मीटर दौड़) से की थी। लेकिन उनके पिता सुनील राघव, जो कॉलेज के दिनों में लेग-स्पिनर थे, चाहते थे कि बेटी क्रिकेट में हाथ आजमाए। सात साल की उम्र में जब पिता उन्हें क्रिकेट एकेडमी ले गए, तो पहले ही सेशन में फील्डिंग करके समायरा को खेल से प्यार हो गया। सुनील खुद भारत के लिए खेलने का सपना देखते थे, लेकिन पढ़ाई पर ध्यान देने के लिए उन्होंने क्रिकेट छोड़ दिया और आईआईएम कलकत्ता से एमबीए किया। समायरा कहती हैं, "मुझे लगता है कि उनकी खुद की इच्छा थी कि वे भारत के स्तर पर क्रिकेट खेलें, लेकिन वे ऐसा नहीं कर पाए। इसलिए, अब वे शायद मुझमें अपना सपना देखते हैं और मैं उसी दिशा में काम कर रही हूं।"
बल्लेबाजी में फिनिशर की भूमिका
शुरुआत में एक सलामी बल्लेबाज के तौर पर खेलने वाली समायरा ने अपनी भूमिका में एक बड़ा बदलाव किया। सीनियर खिलाड़ियों के साथ खेलते हुए उन्हें बल्लेबाजी क्रम में नीचे भेजा जाने लगा। उनके कोचों ने उन्हें छक्के लगाने की कला विकसित करने की सलाह दी। समायरा ने बताया, "खेल के फॉर्मेट छोटे हो गए हैं और हर कोई पावर-हिटिंग पर ध्यान दे रहा है। मैंने भी सोचा कि जो ट्रेंड चल रहा है, मुझे भी उसे सीखना चाहिए।" अब वह एक फिनिशर की भूमिका निभाती हैं और भारत के पूर्व कप्तान एमएस धोनी व विकेटकीपर-बल्लेबाज ऋचा घोष को अपना रोल मॉडल मानती हैं। इस साल विमेंस दिल्ली प्रीमियर लीग में उन्होंने 'नॉर्थ दिल्ली स्ट्राइकर्स' के लिए खेलते हुए एक मैच में आखिरी गेंद पर छक्का लगाकर टीम को जीत दिलाई थी।
शानदार प्रदर्शन और पारिवारिक पृष्ठभूमि
समायरा का हालिया प्रदर्शन शानदार रहा है। उन्होंने अंडर-19 महिला टी20 ट्रॉफी में दिल्ली के लिए सात पारियों में 162 रन बनाए। वहीं, चैलेंजर ट्रॉफी में टीम डी के लिए खेलते हुए एक मैच में 44 गेंदों पर 78 रनों की विस्फोटक पारी खेली, जिसमें छह चौके और छह छक्के शामिल थे। समायरा के माता-पिता, सुनील राघव और पूजा जैन, 'एलिमेंटरी' नाम की एक कंपनी चलाते हैं जो लिथियम-आयन बैटरी की रीसाइक्लिंग में माहिर है। समायरा वर्तमान में हौज खास स्थित 'सिटी क्रिकेट एकेडमी' में दिल्ली की सीनियर महिला टीम की हेड कोच दीप्ति ध्यानी के मार्गदर्शन में ट्रेनिंग ले रही हैं।
इनपुट: IANS


