सौरव गांगुली की बड़ी जीत: सुप्रीम कोर्ट ने 14.5 करोड़ के अवॉर्ड पर लगाई मुहर, मैनेजमेंट कंपनी की याचिका खारिज
भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान सौरव गांगुली को एक पुराने कानूनी विवाद में सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। शीर्ष अदालत ने परसेप्ट टैलेंट मैनेजमेंट कंपनी की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें…
भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान सौरव गांगुली को एक पुराने कानूनी विवाद में सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। शीर्ष अदालत ने परसेप्ट टैलेंट मैनेजमेंट कंपनी की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें गांगुली के पक्ष में दिए गए करीब 14.5 करोड़ रुपये के एक आर्बिट्रल अवॉर्ड को चुनौती दी गई थी। समाचार एजेंसी IANS के मुताबिक, यह मामला दो दशक पुराने एक समझौते से जुड़ा है।
सोमवार को हुई सुनवाई में चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने कलकत्ता हाईकोर्ट के फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया, जिसने पहले ही गांगुली के पक्ष में फैसला सुनाया था।
क्या था पूरा विवाद?
यह मामला साल 2003 में सौरव गांगुली और परसेप्ट टैलेंट मैनेजमेंट के बीच हुए एक खिलाड़ी प्रतिनिधित्व समझौते (player representation agreement) से शुरू हुआ था। इस समझौते के तहत कंपनी को गांगुली के व्यावसायिक और प्रचार संबंधी अधिकारों के प्रबंधन की जिम्मेदारी दी गई थी।
विवाद तब खड़ा हुआ जब परसेप्ट ने यह दलील दी कि इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) में कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) से सौरव गांगुली को मिली कमाई को भी दोनों के बीच हुए राजस्व-साझाकरण समझौते का हिस्सा माना जाना चाहिए। कंपनी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता नकुल दीवान ने तर्क दिया कि समझौते में प्रचार सेवाओं से जुड़ी शर्तें काफी व्यापक थीं और आर्बिट्रल ट्रिब्यूनल ने अनुबंध को सही ढंग से नहीं समझा।
कोर्ट ने क्या कहा?
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने परसेप्ट की दलीलों को स्वीकार नहीं किया। जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने इस बात पर जोर दिया कि एक खिलाड़ी के तौर पर गांगुली का KKR से जुड़ना और उनके द्वारा की जाने वाली प्रचार गतिविधियाँ (promotional activities) दो अलग-अलग चीजें हैं। अदालत ने आर्बिट्रल ट्रिब्यूनल और कलकत्ता हाईकोर्ट के निष्कर्षों में दखल देने से साफ इनकार कर दिया। गौरतलब है कि सौरव गांगुली का पक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता गौरब बनर्जी ने रखा था।
आर्बिट्रल ट्रिब्यूनल ने मूल रूप से सौरव गांगुली के पक्ष में 14,49,91,000 रुपये का अवॉर्ड, उस पर 12 प्रतिशत ब्याज और 50 लाख रुपये की लागत का आदेश दिया था, जिसे अब सुप्रीम कोर्ट ने भी बरकरार रखा है।
इनपुट: IANS


