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झारखंड: भारतीय हॉकी की वो 'नर्सरी' जहाँ हर घर में धड़कता है खेल का जुनून

(फोटो: IANS)

झारखंड भारतीय महिला हॉकी का 'हार्ट लैंड' यानी धड़कन बनकर उभरा है। यह वो ज़मीन है जहाँ के सिमडेगा, खूंटी और गुमला जैसे ज़िलों में बच्चों के लिए हॉकी सिर्फ एक खेल नहीं, बल्…

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पूरे राज्य में 5,000 से ज़्यादा लड़के और लड़कियां आवासीय और गैर-आवासीय कार्यक्रमों के तहत प्रशिक्षण ले रहे हैं, जिससे झारखंड भारत की सबसे उर्वर हॉकी नर्सरी में से एक के र…

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झारखंड का हॉकी से रिश्ता 20वीं सदी की शुरुआत से ही गहरा रहा है। इसकी विरासत 1928 के एम्स्टर्डम ओलंपिक्स में भारत को स्वर्ण पदक दिलाने वाले कप्तान जयपाल सिंह मुंडा से जुड़…

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साई मीडिया से बातचीत में जगन टोपनो ने कहा, "झारखंड के तीन जिलों – खूंटी, सिमडेगा और गुमला – के हर घर में हर बच्चा हॉकी खेलता है। सुबह-शाम, आपको पूरे झारखंड में खेतों में…

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अगर कोई एक ज़िला झारखंड की हॉकी संस्कृति का प्रतीक है, तो वह सिमडेगा है, जिसे अक्सर भारत की "हॉकी नर्सरी" कहा जाता है। कम सुविधाओं के बावजूद इस ज़िले ने लगातार देश को बेह…

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सिमडेगा के अलावा खूंटी, गुमला, रांची, लातेहार और हजारीबाग जैसे कई ज़िलों में आवासीय और गैर-आवासीय केंद्र चल रहे हैं। जमशेदपुर में टाटा एकेडमी और नेशनल हॉकी एकेडमी भी इस न…

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