नागोया में हुए एशियाई पैरा गेम्स में भाला फेंक खिलाड़ी रिंकू हुड्डा ने स्वर्ण पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया, लेकिन इस चमक के पीछे निजी त्रासदी और शारीरिक संघर्ष की एक दर…
रिंकू की माँ का निधन 8 अगस्त को हुआ था, जिसके बाद से वे गहरे भावनात्मक दौर से गुज़र रहे हैं। उन्होंने कहा, "ऐसा कोई दिन नहीं रहा, जब मैं रोया न होऊं... सुबह से शाम तक। मै…
माँ के निधन के बाद 19 अगस्त को जब रिंकू ने दोबारा प्रशिक्षण शुरू किया, तो उनके कंधे में ग्रेड-1 टियर की चोट लग गई। इस दोहरी मार ने उनकी तैयारियों को और मुश्किल बना दिया।…
प्रतियोगिता में मुकाबला बेहद करीबी रहा। हमवतन अजीत सिंह ने 65.02 मीटर के थ्रो के साथ बढ़त बना ली थी। स्वर्ण पदक के लिए रिंकू को अपने आखिरी मौके पर इससे बेहतर प्रदर्शन करन…
रिंकू ने भावुक होते हुए अपनी माँ के अंतिम पलों को याद किया। उन्होंने बताया कि निधन वाले दिन दोपहर 3:10 बजे तक उनकी माँ उनके हाथ पर सिर रखकर सो रही थीं। तभी डोपिंग टीम नमू…
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