एशियन गेम्स में भारतीय हॉकी टीम पर भारी दबाव, पूर्व कप्तान ने वर्ल्ड कप प्रदर्शन पर उठाए सवाल
हॉकी वर्ल्ड कप में उम्मीद से काफी फीके प्रदर्शन के बाद भारतीय पुरुष हॉकी टीम पर आगामी एशियन गेम्स में बेहतर करने का भारी दबाव होगा। भारत के पूर्व कप्तान विरेन रास्किन्हा का मानना है कि टीम वर्ल्ड कप…
हॉकी वर्ल्ड कप में उम्मीद से काफी फीके प्रदर्शन के बाद भारतीय पुरुष हॉकी टीम पर आगामी एशियन गेम्स में बेहतर करने का भारी दबाव होगा। भारत के पूर्व कप्तान विरेन रास्किन्हा का मानना है कि टीम वर्ल्ड कप में अपना स्वाभाविक खेल नहीं दिखा पाई, और अब जापान में उसकी असली परीक्षा होगी, जहाँ दाँव पर लॉस एंजिल्स 2028 ओलिंपिक का सीधा टिकट लगा होगा।
समाचार एजेंसी IANS के साथ एक वर्चुअल बातचीत में रास्किन्हा ने टीम के हालिया प्रदर्शन और भविष्य की चुनौतियों पर अपनी राय साझा की। हाल ही में नीदरलैंड और बेल्जियम में हुए पुरुष हॉकी वर्ल्ड कप में भारतीय टीम आठवें स्थान पर रही थी। अब टीम का अगला बड़ा लक्ष्य 19 सितंबर से जापान के आइची-नागोया में शुरू हो रहे एशियन गेम्स 2026 हैं। इस टूर्नामेंट में स्वर्ण पदक जीतने वाली टीम सीधे 2028 ओलिंपिक के लिए क्वालिफाई कर जाएगी।
प्रदर्शन में सुधार की बड़ी गुंजाइश
रास्किन्हा ने टीम के प्रदर्शन पर बेबाकी से अपनी बात रखते हुए कहा, "जाहिर है कि दबाव तो होगा ही, क्योंकि पुरुष हॉकी के लिहाज से हमने उम्मीद से कमतर प्रदर्शन किया।" उन्होंने महसूस किया कि पुरुष टीम कई मोर्चों पर संघर्ष करती दिखी। उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि कई ऐसे क्षेत्र हैं जिनमें हम सुधार कर सकते हैं। मुझे लगा -- मैं किसी का नाम नहीं लेना चाहता, लेकिन हर पहलू में, चाहे वह गोलकीपिंग हो, टीम के तौर पर कुल मिलाकर डिफेंस हो, मिडफील्ड हो, अटैक में मदद करना हो, डिफेंस में वापस लौटना हो, या फिर फॉरवर्ड्स की तेजी हो।"
पूर्व कप्तान ने यह भी कहा कि टीम गोल करने के लिए कप्तान हरमनप्रीत सिंह के ड्रैग फ्लिक पर बहुत ज्यादा निर्भर है। "हमें पेनल्टी कॉर्नर के वेरिएशन में कहीं बेहतर करने की जरूरत है। हमें सच में अपने फॉरवर्ड्स से बेहतर प्रदर्शन की जरूरत है, ताकि वे या तो अधिक फील्ड गोल करें या फिर 'डी' के अंदर ज्यादा तेजी दिखाएं।"
'हैंडब्रेक लगाकर खेलने' जैसा प्रदर्शन
रास्किन्हा के अनुसार, वर्ल्ड कप में टीम अपनी पूरी क्षमता से नहीं खेल पाई। उन्होंने कहा, "मेरी राय में, सुधार की बहुत गुंजाइश है। इसके साथ ही, मुझे लगता है कि वर्ल्ड कप में पुरुषों की हॉकी के मामले में ऐसा लगा कि हम जैसे 'हैंडब्रेक' लगाकर खेल रहे थे और अपना 100 प्रतिशत नहीं दे रहे थे।" उन्होंने स्पष्ट किया कि वे टीम की एकता पर सवाल नहीं उठा रहे, लेकिन मैदान पर जोश और तीव्रता की कमी दिखी।
महिला टीम के प्रदर्शन की सराहना
पुरुष टीम के विपरीत, रास्किन्हा ने महिला हॉकी टीम के प्रदर्शन की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा, "मुझे लगा कि महिला टीम ने उम्मीद से कहीं बेहतर प्रदर्शन किया। इसलिए उन्हें अपनी सकारात्मक लय बनाए रखने की जरूरत है।" उन्होंने गोलकीपर बिचू देवी खारीबम की विशेष प्रशंसा की, जो अनुभवी सविता पूनिया की छाया में रहकर भी वर्ल्ड कप में शानदार प्रदर्शन करने में कामयाब रहीं। उन्होंने साक्षी राणा और सुनेलिता टोप्पो जैसी युवा खिलाड़ियों के खेल को भी सराहा।
एशियन गेम्स में लक्ष्य के बारे में उन्होंने कहा, "दोनों टीमों का लक्ष्य गोल्ड जीतना होना चाहिए क्योंकि मैंने जैसा कहा कि गोल्ड मेडल के साथ ओलंपिक क्वालिफिकेशन जुड़ा है, और यह बहुत जरूरी है।"
इनपुट: IANS


