शनिवार, 1 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
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कॉमनवेल्थ गेम्स T47 फाइनल: भारत के दिलीप महादु ने जीता सोना, मोहम्मद बासिल को मिला सिल्वर

ग्लासगो में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत के पैरा-एथलीटों ने 100 मीटर T47 फाइनल स्पर्धा में शानदार प्रदर्शन करते हुए दोहरी सफलता हासिल की है। दिलीप महादु ने जहाँ स्वर्ण पदक पर कब्जा जमाया…

कॉमनवेल्थ गेम्स T47 फाइनल: भारत के दिलीप महादु ने जीता सोना, मोहम्मद बासिल को मिला सिल्वर
(फोटो: IANS)

ग्लासगो में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत के पैरा-एथलीटों ने 100 मीटर T47 फाइनल स्पर्धा में शानदार प्रदर्शन करते हुए दोहरी सफलता हासिल की है। दिलीप महादु ने जहाँ स्वर्ण पदक पर कब्जा जमाया, वहीं मोहम्मद बासिल ने अपने करियर के पहले ही अंतर्राष्ट्रीय मुकाबले में रजत पदक जीतकर देश का मान बढ़ाया।

समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, केरल के मलप्पुरम जिले के रहने वाले बासिल ने 10.83 सेकंड का समय निकालते हुए सिल्वर मेडल अपने नाम किया, जो इस सीजन में उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन भी है। अपनी इस उपलब्धि पर उन्होंने कहा, "मैं बहुत खुश और उत्साहित हूं, क्योंकि यह मेरी पहली इंटरनेशनल प्रतियोगिता है। अगली प्रतियोगिता में मैं बेहतर टाइमिंग के साथ वापस आऊंगा।" उन्होंने खराब मौसम को अपनी धीमी टाइमिंग का कारण बताते हुए यह मेडल अपने कोच, परिवार और समर्थकों को समर्पित किया।

गुरु-शिष्य की बेमिसाल कहानी

इस स्पर्धा में 10.71 सेकंड के समय के साथ गोल्ड मेडल जीतने वाले दिलीप महादु की कहानी बेहद प्रेरणादायक है। उन्होंने अपनी जीत का श्रेय अपने कोच को दिया, जिन्होंने न केवल उन्हें प्रशिक्षित किया बल्कि गोद भी लिया। IANS से बातचीत में दिलीप ने बताया, "आज गुरु पूर्णिमा है, तो यह मेडल गुरु के लिए गिफ्ट है।" उन्होंने बचपन में एक पेड़ से गिरने की घटना का जिक्र किया, जिसके कारण उनका एक हाथ काटना पड़ा।

दिलीप के अनुसार, उनके कोच ने उन्हें दौड़ते हुए देखा और परिवार की आर्थिक तंगी को देखते हुए उन्हें गोद ले लिया। वे नासिक में अपने कोच के साथ ही रहते और ट्रेनिंग करते हैं।

सरकार और समाज का मिला साथ

दोनों एथलीटों ने अपने सफर में मिले समर्थन का भी जिक्र किया। दिलीप ने पैरा-एथलीटों का समर्थन करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा, "पैरालंपिक, साई (भारतीय खेल प्राधिकरण) और हमारी सरकार भी बहुत सपोर्ट करती है, जिसके कारण ही हम देश का नाम रोशन कर सके हैं।" उन्होंने यह भी बताया कि कैसे बचपन में लोग उनका मजाक उड़ाते थे, लेकिन उन्होंने सबको नजरअंदाज कर अपने खेल पर ध्यान दिया। उनका अगला लक्ष्य ओलंपिक में देश के लिए स्वर्ण पदक जीतना है।

इनपुट: IANS

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