टीम इंडिया का टेस्ट क्रिकेट में संकट: दिग्गज बाहर, युवा अस्थिर — क्यों घर में भी हार रही है भारतीय टीम?
एक समय था जब भारतीय क्रिकेट टीम को उसके घर में टेस्ट मैचों में हराना लगभग नामुमकिन माना जाता था, लेकिन अब हालात बदल गए हैं। न्यूजीलैंड और दक्षिण अफ्रीका जैसी टीमों के खिलाफ घरेलू सीरीज में न सिर्फ…
एक समय था जब भारतीय क्रिकेट टीम को उसके घर में टेस्ट मैचों में हराना लगभग नामुमकिन माना जाता था, लेकिन अब हालात बदल गए हैं। न्यूजीलैंड और दक्षिण अफ्रीका जैसी टीमों के खिलाफ घरेलू सीरीज में न सिर्फ हार मिल रही है, बल्कि टीम सभी मैच गंवा रही है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय टीम टेस्ट फॉर्मेट में एक मुश्किल बदलाव के दौर से गुजर रही है, जिसका सीधा असर उसके प्रदर्शन पर दिख रहा है।
गौतम गंभीर के हेड कोच बनने के बाद से यह गिरावट और भी स्पष्ट हुई है। टीम खेल के तीनों विभागों — बल्लेबाजी, गेंदबाजी और फील्डिंग — में संघर्ष कर रही है। यह संकट सिर्फ घरेलू मैदान तक सीमित नहीं है, विदेशी दौरों पर भी टीम का प्रदर्शन कमजोर हुआ है।
दिग्गजों का संन्यास और अनुभव की कमी
टीम के इस खराब प्रदर्शन की एक बड़ी वजह कई अनुभवी खिलाड़ियों का टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लेना है। विराट कोहली, आर अश्विन और रोहित शर्मा जैसे दिग्गजों ने इस फॉर्मेट को अलविदा कह दिया है। हाल ही में, लगभग दो साल तक टीम से बाहर रहने के बाद अजिंक्य रहाणे ने भी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास की घोषणा कर दी। विराट और अश्विन पिछले दशक में भारत की टेस्ट सफलताओं के मुख्य स्तंभ थे और दोनों के जाने से बल्लेबाजी और गेंदबाजी, दोनों में एक बड़ा खालीपन आ गया है।
विशेषज्ञों की अनदेखी और लगातार प्रयोग
रिपोर्ट के अनुसार, टीम मैनेजमेंट अनुभवी और विशेषज्ञ खिलाड़ियों को नजरअंदाज कर लगातार प्रयोग कर रहा है, जिसका खामियाजा टीम को भुगतना पड़ रहा है। मोहम्मद शमी लंबे समय से टीम से बाहर हैं, जबकि वह घरेलू क्रिकेट में लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं। इसी तरह, ऑलराउंडर अक्षर पटेल को भी टीम में नियमित जगह नहीं मिल रही है। सरफराज खान, जिन्होंने घरेलू क्रिकेट और कुछ मौकों पर राष्ट्रीय टीम के लिए भी अच्छा प्रदर्शन किया है, को भी स्थायी जगह नहीं दी गई है।
असुरक्षित प्लेइंग इलेवन
प्लेइंग इलेवन में लगातार हो रहे बदलावों ने खिलाड़ियों के बीच असुरक्षा की भावना पैदा कर दी है। जब खिलाड़ियों को अपनी जगह पक्की नहीं लगती, तो वे अपनी पूरी क्षमता से प्रदर्शन नहीं कर पाते। कुलदीप यादव जैसे स्पिनर को भी नियमित मौके नहीं मिल रहे हैं, जिससे स्पिन आक्रमण कमजोर हुआ है। इन सब वजहों से भारतीय टीम लगातार दो विश्व टेस्ट चैंपियनशिप फाइनल खेलने के बाद अब तीसरे फाइनल की दौड़ से लगभग बाहर हो चुकी है।
इनपुट: IANS


