रविवार, 1 नवम्बर 2026 · नई दिल्ली
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एशियन गेम्स में कांस्य पदक जीत चंबा लौटीं सीमा कुमारी, बोलीं- 'अब देश के लिए गोल्ड लाना है'

एशियन गेम्स 2026 में भारत के लिए कांस्य पदक जीतने वाली धाविका सीमा कुमारी जब अपने गृह नगर चंबा लौटीं, तो उनका भव्य स्वागत किया गया। इस सम्मान से अभिभूत सीमा ने कहा कि यह उन्हें भविष्य में और बेहतर…

एशियन गेम्स में कांस्य पदक जीत चंबा लौटीं सीमा कुमारी, बोलीं- 'अब देश के लिए गोल्ड लाना है'
(फोटो: IANS)

एशियन गेम्स 2026 में भारत के लिए कांस्य पदक जीतने वाली धाविका सीमा कुमारी जब अपने गृह नगर चंबा लौटीं, तो उनका भव्य स्वागत किया गया। इस सम्मान से अभिभूत सीमा ने कहा कि यह उन्हें भविष्य में और बेहतर करने के लिए प्रेरित करेगा, लेकिन उनका असली लक्ष्य देश के लिए स्वर्ण पदक जीतना है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, सीमा ने आइची-नागोया में आयोजित खेलों की 10,000 मीटर दौड़ 32 मिनट 50.05 सेकंड में पूरी कर यह उपलब्धि हासिल की।

चंबा पहुंचने पर मिले प्यार और सम्मान पर खुशी जताते हुए सीमा ने कहा, "आज तक मेरा ऐसे कभी स्वागत नहीं हुआ था। ये मुझे आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेगा।" उन्होंने इस कार्यक्रम के आयोजकों, विशेषकर राइजिंग स्टार स्कूल के प्रधानाचार्य संजीव सूरी का धन्यवाद किया, जो 2017 से उनका समर्थन कर रहे हैं।

“इस ब्रॉन्ज से खुश नहीं हूं”

पदक जीतने के बावजूद सीमा की नजरें और बड़े लक्ष्य पर हैं। उन्होंने अपनी भावनाओं को व्यक्त करते हुए कहा, "इस मेडल के बाद मुझे पूरे भारतवासियों ने बहुत ज्यादा प्यार दिया है। मैं सभी का बहुत आभार व्यक्त करती हूं, लेकिन अब ये लगता है कि मुझे मेरे देश के लिए गोल्ड मेडल जीतकर लाना है, क्योंकि ये ब्रॉन्ज है, मैं इससे नहीं खुश हूं इतना ज्यादा कि मैंने ब्रॉन्ज जीता है।"

सफलता का श्रेय और भविष्य की तैयारी

सीमा ने अपनी इस सफलता का श्रेय कई लोगों को दिया। उन्होंने कहा, "इस मेडल में बहुत सारे लोगों का हाथ रहा है। हमारी एथलेटिक्स फेडरेशन ऑफ इंडिया, साई, टॉप्स इस टाइम पे बहुत ही अच्छा हमारे लिए कर रहे हैं।" उन्होंने बताया कि उन्हें अमेरिका में ट्रेनिंग के लिए भेजा जाता है, जहां ओलंपिक और वर्ल्ड चैंपियन एथलीटों के साथ अभ्यास करने का मौका मिलता है, जिससे बहुत कुछ सीखने को मिलता है।

अपनी मां के त्याग को याद करते हुए वह भावुक हो गईं और कहा, "मेरी मां का भी इस मेडल के पीछे बहुत बड़ा हाथ है। मैं उनका कभी अहसान नहीं चुका पाऊंगी।" उन्होंने अपने दिवंगत पिता को भी याद किया और कहा कि आज पूरे चंबा को उन पर गर्व है, जो उनके लिए सबसे बड़ी खुशी की बात है।

इनपुट: IANS

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News4Social स्पोर्ट्स डेस्क

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