शनिवार, 31 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
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कोरोना में बिका बिजनेस, ज़मीन बेची: बेटी सोनम मस्कर ने एशियन गेम्स में सिल्वर जीतकर परिवार का संघर्ष सार्थक किया

एशियन गेम्स में भारत को 10 मीटर एयर राइफल टीम स्पर्धा में रजत पदक दिलाने वाली सोनम मस्कर की सफलता के पीछे एक परिवार के अथक संघर्ष, त्याग और अटूट विश्वास की कहानी है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के…

कोरोना में बिका बिजनेस, ज़मीन बेची: बेटी सोनम मस्कर ने एशियन गेम्स में सिल्वर जीतकर परिवार का संघर्ष सार्थक किया
(फोटो: IANS)

एशियन गेम्स में भारत को 10 मीटर एयर राइफल टीम स्पर्धा में रजत पदक दिलाने वाली सोनम मस्कर की सफलता के पीछे एक परिवार के अथक संघर्ष, त्याग और अटूट विश्वास की कहानी है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, कोरोना महामारी के दौरान जब सोनम के पिता का व्यवसाय ठप्प हो गया, तो परिवार को अपनी ज़मीन और दुकान तक बेचनी पड़ी, लेकिन उन्होंने बेटी के सपनों को टूटने नहीं दिया।

रविवार को हुए मुकाबले में भारतीय टीम ने कुल 1898.0 अंकों के साथ सिल्वर मेडल अपने नाम किया। इस जीत में कोल्हापुर की सोनम का योगदान अहम रहा, जिन्होंने क्वालिफिकेशन राउंड में 634.1 अंकों के शानदार प्रदर्शन के साथ तीसरा स्थान हासिल किया। टीम की अन्य सदस्यों, एलावेनिल वलारिवन ने 633.5 अंकों के साथ सातवां और विदर्सा कोचालुमकाल विनोद ने 630.4 अंक हासिल किए।

आर्थिक तंगी और परिवार का त्याग

सोनम का परिवार कई साल पहले व्यवसाय के लिए मुंबई में बस गया था, लेकिन लॉकडाउन ने सब कुछ बदल दिया। काम बंद होने पर उन्हें कोल्हापुर अपने गांव लौटना पड़ा, जहाँ गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया। परिवार ने पहले अपनी आजीविका का साधन एक टैंकर बेचा और बाद में दूसरा भी। सोनम के महंगे शूटिंग उपकरणों और बच्चों की पढ़ाई में कोई बाधा न आए, इसके लिए परिवार ने अपनी साढ़े 10 गुंठे ज़मीन और गडहिंग्लज की दुकान भी बेच दी।

उनके पिता उत्तम मस्कर ने IANS को बताया, "बेटी ने 11वीं में राइफल शूटिंग को चुना। यह बहुत खर्चीला खेल था। लॉकडाउन में मेरा बिजनेस ठप्प हो गया, जिसके बाद हमें गांव लौटना पड़ा।" उन्होंने बताया कि कोल्हापुर की 'वेद एकेडमी' में मजबूत आधार बनने के बाद उसका चयन एनसीओई में हुआ और अब वह दिल्ली में प्रशिक्षण ले रही है।

सफलता के पीछे की कड़ी मेहनत

सोनम की माँ सुमन बताती हैं कि बेटी की उपलब्धि पर उन्हें बहुत गर्व है। उन्होंने कहा, "प्रैक्टिस के दौरान वह 5-6 घंटे खड़ी रहती है और भारी-भरकम राइफल व भारी ड्रेस के साथ कड़ी मेहनत करती है; स्कोर अच्छा न होने पर वह शाम को वापस प्रैक्टिस के लिए जाती है।" वहीं, बहन मानसी का मानना है कि सोनम की मेहनत को देखते हुए उन्हें पूरा विश्वास है कि वह ओलंपिक में भी देश के लिए स्वर्ण पदक जीतेंगी।

इस ऐतिहासिक जीत के बाद सोनम ने भी अपना अगला लक्ष्य स्पष्ट कर दिया है। उन्होंने कहा, "2028 के ओलंपिक खेलों में भारत के लिए स्वर्ण पदक जीतना ही मेरा मुख्य लक्ष्य है और इसके लिए मैं अभी से कड़ी मेहनत और तैयारी कर रही हूं।"

इनपुट: IANS

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News4Social स्पोर्ट्स डेस्क

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