एशियाई खेलों में 44 साल बाद मैराथन का सूखा खत्म करने वाले सावन बरवाल की नज़र अब ओलंपिक पर
एशियाई खेलों की पुरुष मैराथन स्पर्धा में 44 साल के लंबे इंतजार को खत्म करते हुए भारत को रजत पदक दिलाने वाले धावक सावन बरवाल का अगला लक्ष्य अब ओलंपिक में देश का परचम लहराना है। हिमाचल प्रदेश के मंडी…
एशियाई खेलों की पुरुष मैराथन स्पर्धा में 44 साल के लंबे इंतजार को खत्म करते हुए भारत को रजत पदक दिलाने वाले धावक सावन बरवाल का अगला लक्ष्य अब ओलंपिक में देश का परचम लहराना है। हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले के जोगिंदरनगर निवासी सावन ने जापान के आइची-नागोया में आयोजित 2026 एशियन गेम्स में यह ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की।
समाचार एजेंसी IANS के साथ एक खास बातचीत में सावन ने अपने भविष्य के लक्ष्यों पर चर्चा की। उन्होंने कहा, "अगला लक्ष्य वर्ल्ड चैंपियनशिप है, जो अगले साल होनी है। इसके बाद मुख्य लक्ष्य 2028 में लॉस एंजिल्स में होने वाले ओलंपिक में पदक जीतना है।" अपने कोच की उम्मीदों पर खरा उतरने का संकल्प जताते हुए उन्होंने कहा, "मेरे कोच मुझे ओलंपिक में देखना चाहते हैं और इसके लिए मैं कड़ी मेहनत करूंगा।"
शानदार प्रदर्शन और घर वापसी
सावन बरवाल ने पुरुष मैराथन स्पर्धा को 2 घंटे 11 मिनट 37 सेकंड में पूरा कर सिल्वर मेडल अपने नाम किया। इस प्रदर्शन के साथ उन्होंने अपना ही राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़ते हुए अपना व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ समय भी निकाला। इस इवेंट में जापान के इचिटाका यामाशिता ने स्वर्ण पदक जीता, जबकि चीन के पेइयू फेंग को कांस्य पदक मिला। भारतीय सेना में कार्यरत सावन का घर पहुंचने पर जोरदार स्वागत हुआ, जिसे देखकर वह बेहद खुश हुए। उन्होंने कहा, "लंबे समय बाद घर वापस लौटा हूं। हर जगह खुशी का माहौल है।"
जीत की रणनीति
अपनी सफलता का राज साझा करते हुए सावन ने बताया कि वह एक खास रणनीति के साथ मैदान में उतरे थे। "एशियन गेम्स की बात करें तो काफी अच्छी तैयारी चल रही थी। उस समय फिटनेस का स्तर भी काफी अच्छा था। हम एक रणनीति लेकर एशियन गेम्स में पहुंचे थे और उसी पर आखिर तक डटे रहे," उन्होंने बताया। अपनी योजना के बारे में उन्होंने आगे कहा, "आखिरी के 5-6 किलोमीटर बचे थे तो हमने जोर लगाया और पदक हासिल किया।"
इनपुट: IANS


