रविवार, 1 नवम्बर 2026 · नई दिल्ली
अन्य खेल

देश के लिए गोल्ड ही मेरी दिवाली है: एशियन गेम्स के नए चैंपियन पहलवान सुजीत कलकल

एशियन गेम्स में 65 किलोग्राम फ्रीस्टाइल कुश्ती का गोल्ड मेडल जीतने वाले भारतीय पहलवान सुजीत कलकल ने अपनी प्राथमिकताएं स्पष्ट कर दी हैं। उन्होंने कहा है कि उनके लिए व्यक्तिगत त्योहारों से कहीं बढ़कर…

देश के लिए गोल्ड ही मेरी दिवाली है: एशियन गेम्स के नए चैंपियन पहलवान सुजीत कलकल
(फोटो: IANS)

एशियन गेम्स में 65 किलोग्राम फ्रीस्टाइल कुश्ती का गोल्ड मेडल जीतने वाले भारतीय पहलवान सुजीत कलकल ने अपनी प्राथमिकताएं स्पष्ट कर दी हैं। उन्होंने कहा है कि उनके लिए व्यक्तिगत त्योहारों से कहीं बढ़कर देश के लिए पदक जीतना है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, सुजीत ने कहा, "देश के लिए गोल्ड जीतना ही मेरे लिए दिवाली है।"

23 वर्षीय सुजीत अब अपनी अगली बड़ी चुनौती के लिए तैयार हैं, जो कजाकिस्तान में 24 अक्टूबर से 1 नवंबर तक होने वाली रेसलिंग वर्ल्ड चैंपियनशिप है। यह प्रतियोगिता दिवाली से ठीक एक हफ्ते पहले खत्म होगी। हरियाणा के चरखी दादरी जिले के इमलोटा गांव के इस पहलवान ने कहा कि अगर वह वहां भी स्वर्ण पदक जीतते हैं, तो वही उनके लिए सबसे बड़ा उत्सव होगा।

एशियाई खेलों में यादगार वापसी

सुजीत ने एशियाई खेलों के फाइनल में एक अविश्वसनीय वापसी करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया था। वह ताजिकिस्तान के अब्दुलमजीद कुदिएव के खिलाफ 2-9 से पीछे चल रहे थे, लेकिन आखिरी क्षणों में शानदार दांव लगाकर 10-9 से मुकाबला जीत लिया। अपनी इस वापसी पर उन्होंने बताया, "शुरुआत में मैं फाइनल मुकाबले पर काबू नहीं रख पाया क्योंकि उस समय मैं ठीक से वार्मअप नहीं कर पाया था। उसके बाद, दूसरे पीरियड में मैंने अच्छी पकड़ बनाई और मेरे हर हमले कामयाब रहे।"

विश्व चैंपियनशिप की कठिन चुनौती

आगामी वर्ल्ड चैंपियनशिप को लेकर सुजीत बेहद गंभीर हैं। उनका मानना है कि यह प्रतियोगिता ओलंपिक से भी ज़्यादा कठिन होती है। उन्होंने कहा, "यह एक बहुत जरूरी प्रतियोगिता है और यह ओलंपिक से भी अधिक मुश्किल होने वाला है।" स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (साई) द्वारा आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने बताया कि वह तैयारी के लिए कोई विशेष योजना नहीं बनाते, बल्कि अपनी पिछली गलतियों से सीखकर उनमें सुधार करने पर ध्यान केंद्रित करते हैं।

विदेशी ट्रेनिंग का मिला फायदा

सुजीत ने अपनी सफलता का श्रेय विदेशी ट्रेनिंग को भी दिया। उन्होंने साई सोनीपत में प्रशिक्षण लेने के अलावा रूस और आर्मेनिया में भी तैयारी की थी। उन्होंने कहा, "हमारे जीते गए मेडल्स में ट्रेनिंग सबसे अहम भूमिका निभाती है। रूस में वर्ल्ड चैंपियनशिप, एशियन गेम्स और ओलंपिक के मेडलिस्ट थे, इसलिए सीखने के लिए बहुत कुछ था। यह एक शानदार अनुभव था।" उन्होंने इस अवसर के लिए टॉप्स, साई और डब्ल्यूएफआई का धन्यवाद किया।

इनपुट: IANS

N

News4Social स्पोर्ट्स डेस्क

News4Social स्पोर्ट्स डेस्क — IANS समेत लाइसेंस-प्राप्त समाचार एजेंसियों की फीड से खेल जगत से जुड़ी ताज़ा व प्रामाणिक खबरें संपादकीय समीक्षा के बाद प्रकाशित करता है। हर खबर उसके स्रोत के श्रेय (credit) के साथ दी जाती है। सभी लेख देखें →

आगे पढ़ें

और देखें →