शनिवार, 1 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
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कॉमनवेल्थ गेम्स 2026: क्या बर्मिंघम की चूक को ग्लासगो में पदक में बदल पाएंगे प्रवीण चित्रवेल?

कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 में सिर्फ़ तीन सेंटीमीटर के मामूली अंतर से पदक से चूकने वाले भारत के नेशनल रिकॉर्ड होल्डर प्रवीण चित्रवेल एक बार फिर बड़े मंच पर अपनी छाप छोड़ने को तैयार हैं। ग्लासगो में होने…

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026: क्या बर्मिंघम की चूक को ग्लासगो में पदक में बदल पाएंगे प्रवीण चित्रवेल?
(फोटो: IANS)

कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 में सिर्फ़ तीन सेंटीमीटर के मामूली अंतर से पदक से चूकने वाले भारत के नेशनल रिकॉर्ड होल्डर प्रवीण चित्रवेल एक बार फिर बड़े मंच पर अपनी छाप छोड़ने को तैयार हैं। ग्लासगो में होने वाले कॉमनवेल्थ गेम्स में पुरुषों की ट्रिपल जंप के फाइनल में पहुँच चुके 25 वर्षीय प्रवीण इस बार नतीजे की चिंता किए बिना सिर्फ़ अपने प्रदर्शन पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। समाचार एजेंसी IANS से बातचीत में उन्होंने अपनी रणनीति और तैयारियों पर बात की।

प्रवीण ने बर्मिंघम में पदक न जीत पाने की निराशा को एक बड़ी सीख बताया। उन्होंने कहा, "बर्मिंघम में इतने कम अंतर से पदक चूकने से मुझे बहुत कुछ सीखने को मिला। तब से, हर सीजन तकनीकी, शारीरिक और मानसिक तौर पर एक बेहतर एथलीट बनने के बारे में रहा है।" इस अनुभव ने उन्हें एक खिलाड़ी के तौर पर और मज़बूत बनाया है।

प्रक्रिया पर भरोसा, परिणाम पर नहीं

फाइनल के दबाव को लेकर प्रवीण का नज़रिया बिलकुल साफ़ है। वह पहले से परिणाम के बारे में सोचकर खुद पर बोझ नहीं डालना चाहते। उन्होंने कहा, "मैं प्रतियोगिता से पहले परिणाम के बारे में ज्यादा नहीं सोचना चाहता। मेरा काम अपनी जंप के हर फेज को अच्छे से करना, शांत रहना और अपनी मेहनत पर भरोसा करना है। अगर मैं ऐसा कर सकता हूं, तो मुझे पता है कि प्रदर्शन अच्छा होगा।" उन्होंने क्वालिफिकेशन राउंड में 16.41 मीटर के शानदार प्रयास के साथ फाइनल में जगह बनाई है।

IIS में मिला शानदार माहौल

प्रवीण चित्रवेल बल्लारी स्थित इंस्पायर इंस्टीट्यूट ऑफ स्पोर्ट (आईआईएस) में क्यूबा के कोच योआंद्री बेटानजोस की देखरेख में ट्रेनिंग करते हैं। वह अपने खेल की बारीकियों में सुधार का श्रेय आईआईएस के हाई-परफॉर्मेंस माहौल को देते हैं। बकौल प्रवीण, "ट्रिपल जंप एक ऐसा इवेंट है जहां छोटी-छोटी बातें भी बड़ा फर्क डालती हैं। आईआईएस में, मुझे हर दिन उन चीजों पर काम करने का मौका मिलता है... कैंपस में रहने का मतलब है कि मैं पूरी तरह से प्रशिक्षण पर फोकस कर सकता हूं, और इस निरंतरता ने मुझे एक एथलीट के तौर पर बेहतर बनाने में सच में मदद की है।"

ग्लासगो में होने वाले फाइनल को लेकर उनका लक्ष्य स्पष्ट है - अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना। वह कहते हैं, "अभी, मेरा फोकस ग्लासगो में अपना श्रेष्ठ प्रदर्शन करने, प्रतियोगिता का मजा लेने और हर जंप को अहम बनाने पर है।"

इनपुट: IANS

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News4Social स्पोर्ट्स डेस्क

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