रविवार, 30 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
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वनडे वर्ल्ड कप के नए फॉर्मेट पर भड़के स्कॉटलैंड और नीदरलैंड्स, ICC पर उठाए गंभीर सवाल

अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) द्वारा पुरुष वनडे वर्ल्ड कप क्वालिफिकेशन के ढांचे में अचानक किए गए बदलावों ने एसोसिएट देशों में नाराज़गी पैदा कर दी है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार…

वनडे वर्ल्ड कप के नए फॉर्मेट पर भड़के स्कॉटलैंड और नीदरलैंड्स, ICC पर उठाए गंभीर सवाल
(फोटो: IANS)

अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) द्वारा पुरुष वनडे वर्ल्ड कप क्वालिफिकेशन के ढांचे में अचानक किए गए बदलावों ने एसोसिएट देशों में नाराज़गी पैदा कर दी है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, क्रिकेट स्कॉटलैंड और रॉयल डच क्रिकेट एसोसिएशन (KNCB) ने इन परिवर्तनों को एसोसिएट क्रिकेट के लिए एक 'बड़ा झटका' बताते हुए कड़ी आपत्ति जताई है।

दोनों क्रिकेट बोर्डों ने एक संयुक्त बयान जारी कर चेतावनी दी है कि यह फैसला क्रिकेट के वैश्विक विस्तार और छोटे देशों की प्रगति को कमजोर कर सकता है। उन्होंने ICC की प्रशासनिक ईमानदारी, पारदर्शिता और निर्णय लेने की प्रक्रिया पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं, खासकर जब टूर्नामेंट शुरू होने में 18 महीने से भी कम समय बचा है।

क्या हैं क्वालिफिकेशन में बड़े बदलाव?

यह विवाद जुलाई में एडिनबर्ग में हुई ICC की सालाना कॉन्फ्रेंस के बाद शुरू हुआ। मूल योजना के तहत टूर्नामेंट में 14 टीमें शामिल होनी थीं, जिन्हें सात-सात के दो ग्रुप में बांटा जाता और फिर सुपर सिक्स स्टेज होता। लेकिन अब ICC ने एक नई संरचना पेश की है, जिसमें 'सुपर सीरीज' और 'सुपर 7' जैसे नए चरण जोड़े गए हैं।

नए फॉर्मेट के तहत, क्वालिफाई करने वाली सबसे निचली रैंक की तीन टीमें (12वीं, 13वीं और 14वीं) पहले एक राउंड-रॉबिन सुपर सीरीज खेलेंगी। इसमें से केवल विजेता टीम ही टॉप 11 टीमों के साथ मुख्य ग्रुप में जगह बना पाएगी। इसके बाद, दो मुख्य ग्रुप की टॉप तीन-तीन टीमें और अगली सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाली टीम को मिलाकर सात टीमों का 'सुपर 7' स्टेज होगा, जिससे चार सेमीफाइनलिस्ट तय होंगे।

'पूरी तरह से गलत संदेश'

दोनों बोर्डों ने अपने बयान में कहा, "ऐसे समय में जब क्रिकेट अपनी पहुंच बढ़ाना चाहता है, नए दर्शकों को आकर्षित करना चाहता है और इंटरनेशनल स्पोर्ट्स में अपनी स्थिति मजबूत करना चाहता है, उभरते देशों के लिए सार्थक मौके कम करना पूरी तरह से गलत संदेश देता है।" उनका मानना है कि बदले हुए फॉर्मेट से एसोसिएट देशों के लिए वर्ल्ड कप में खेलने के अवसर स्पष्ट रूप से कम हो गए हैं।

बोर्डों का तर्क है कि सीमित संसाधनों वाले देशों को प्रभावित करने वाले फैसले बिना उचित सलाह-मशविरे के नहीं लिए जाने चाहिए। उन्होंने यह भी बताया कि एडिनबर्ग की बैठक में किसी भी सदस्य देश को इन बदलावों की जानकारी नहीं दी गई थी। एक अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर IANS को बताया, "वहां मौजूद हम सभी के लिए यह बिल्कुल अचानक हुआ।"

बातचीत की कमी और निराशा

स्कॉटलैंड और नीदरलैंड्स बोर्ड ने बताया कि बदलावों की घोषणा के बाद उन्होंने ICC के साथ दो बैठकें कीं, लेकिन दो सप्ताह से अधिक समय बीत जाने के बाद भी ICC की तरफ से कोई जवाब नहीं आया है, जिसे उन्होंने 'निराशाजनक और अनादरपूर्ण' बताया।

उन्होंने कहा, "कम समय में स्ट्रक्चर बदलने से काफी अनिश्चितता पैदा होती है, प्लानिंग में रुकावट आती है, और उन संगठनों पर अतिरिक्त ऑपरेशनल और फाइनेंशियल दबाव पड़ता है जो पहले से ही सीमित संसाधनों के साथ काम कर रहे हैं।" बोर्डों ने ICC को याद दिलाया कि वर्ल्ड कप के कई यादगार पल एसोसिएट देशों के शानदार प्रदर्शन से ही बने हैं, जब उन्होंने बड़ी टीमों को चुनौती दी और हराया।

इनपुट: IANS

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News4Social स्पोर्ट्स डेस्क

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