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क्रिकेट एसोसिएशन में विवाद: अरुणाचल प्रदेश ने बिना खेले गंवाया रणजी ट्रॉफी का पहला मैच

अरुणाचल प्रदेश के क्रिकेटरों के लिए घरेलू सीजन की शुरुआत बेहद निराशाजनक रही है। राज्य की सीनियर पुरुष टीम को प्रशासनिक विवादों के चलते नागालैंड के खिलाफ अपना पहला रणजी ट्रॉफी प्लेट ग्रुप मैच गंवाना…

क्रिकेट एसोसिएशन में विवाद: अरुणाचल प्रदेश ने बिना खेले गंवाया रणजी ट्रॉफी का पहला मैच
(फोटो: IANS)

अरुणाचल प्रदेश के क्रिकेटरों के लिए घरेलू सीजन की शुरुआत बेहद निराशाजनक रही है। राज्य की सीनियर पुरुष टीम को प्रशासनिक विवादों के चलते नागालैंड के खिलाफ अपना पहला रणजी ट्रॉफी प्लेट ग्रुप मैच गंवाना पड़ा है। यह मैच रविवार को अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में शुरू होना था, लेकिन टीम मैदान पर नहीं उतर सकी। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, यह घटनाक्रम अरुणाचल क्रिकेट एसोसिएशन (ACA) के भीतर चल रही कानूनी लड़ाई का सीधा नतीजा है, जिसने राज्य में क्रिकेट की सभी गतिविधियों को ठप कर दिया है।

यह पहली बार नहीं है जब इस विवाद का असर खिलाड़ियों पर पड़ा है। इसी हफ्ते की शुरुआत में, अरुणाचल प्रदेश भुवनेश्वर में सिक्किम के खिलाफ वीनू मांकड़ ट्रॉफी का मैच भी नहीं खेल पाया था। इन घटनाओं ने राज्य में जूनियर से लेकर सीनियर स्तर तक के क्रिकेटरों के भविष्य पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

विवाद की जड़ क्या है?

यह पूरा संकट अरुणाचल क्रिकेट एसोसिएशन (ACA) के सितंबर में हुए चुनावों से शुरू हुआ, जिसमें नबम विवेक को अध्यक्ष चुना गया था। इसके तुरंत बाद, छह जिला संघों — लोअर सियांग, अपर सुबनसिरी, कामले, तवांग, वेस्ट सियांग और पापुम पारे — ने चुनाव प्रक्रिया में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए इसे अदालत में चुनौती दे दी। उनकी मांग थी कि चुनाव रद्द कर नए सिरे से कराए जाएँ।

मामला अब गुवाहाटी हाई कोर्ट की ईटानगर बेंच में लंबित है, जिसने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। अदालत ने एसोसिएशन के कामकाज पर अंतरिम रोक लगा दी है, जिससे कोई भी पदाधिकारी टीम चयन या अन्य प्रशासनिक फैसले लेने में असमर्थ है।

BCCI भी क्यों नहीं कर पा रहा मदद?

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) भी इस मामले में सीधे हस्तक्षेप नहीं कर पा रहा है। BCCI सचिव देवजीत सैकिया ने IANS को बताया था, "अरुणाचल क्रिकेट एसोसिएशन में दो गुट हैं, और उनके बीच कानूनी विवाद चल रहा है। हाई कोर्ट ने कुछ महीने पहले बोर्ड के कामकाज पर रोक लगाने का आदेश दिया था।"

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जब तक अदालत का फैसला नहीं आ जाता, तब तक BCCI के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था बनाना मुश्किल है। सैकिया ने कहा, "चूंकि मामला कोर्ट में है, इसलिए BCCI भी दखल नहीं दे सकता।" इसी गतिरोध के कारण राज्य पहले ही वीनू मांकड़ ट्रॉफी और अंडर-19 महिला टी20 ट्रॉफी में अपनी टीमें नहीं भेज सका है।

खिलाड़ियों का भविष्य दांव पर

इस प्रशासनिक शून्य का सबसे बड़ा खामियाजा युवा क्रिकेटरों को भुगतना पड़ रहा है, जो राष्ट्रीय स्तर पर खेलने के कीमती मौके खो रहे हैं। रणजी ट्रॉफी मैच गंवाना सीनियर टीम के लिए एक बड़ा झटका है, और अगर यह विवाद जल्द नहीं सुलझा तो अरुणाचल प्रदेश की बाकी घरेलू सीजन में भागीदारी भी अनिश्चित हो सकती है। गौरतलब है कि पिछले सीजन में भी टीम का प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा था और वह अपने सभी पांचों मैच हारकर प्लेट ग्रुप में सबसे नीचे रही थी।

इनपुट: IANS

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News4Social स्पोर्ट्स डेस्क

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