भारतीय क्रिकेट: पुरुष और महिला टीमों के लिए BCCI ने निकालीं दो अहम पदों पर भर्तियां
भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने अपनी सीनियर पुरुष और महिला टीमों के लिए दो महत्वपूर्ण सहयोगी स्टाफ पदों पर नियुक्तियों की प्रक्रिया शुरू कर दी है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार…
भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने अपनी सीनियर पुरुष और महिला टीमों के लिए दो महत्वपूर्ण सहयोगी स्टाफ पदों पर नियुक्तियों की प्रक्रिया शुरू कर दी है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, बोर्ड ने सीनियर महिला टीम के लिए एक फील्डिंग कोच और सीनियर पुरुष टीम के लिए एक हेड फिजियोथेरेपिस्ट के पदों के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं। इच्छुक उम्मीदवार 16 नवंबर की शाम 5 बजे तक इन पदों के लिए आवेदन कर सकते हैं।
ये भर्तियां क्रमशः मुनीश बाली और कमलेश जैन के स्थान पर की जा रही हैं। इन दोनों भूमिकाओं को राष्ट्रीय टीमों के साथ काम करने और खिलाड़ियों के प्रदर्शन को बेहतर बनाने के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
महिला टीम के लिए फील्डिंग कोच की भूमिका
चुने गए फील्डिंग कोच पर भारत की सीनियर महिला क्रिकेट टीम के तीनों प्रारूपों (टेस्ट, वनडे, टी20) में फील्डिंग के स्तर को विकसित करने और प्रबंधित करने की जिम्मेदारी होगी। इसमें खिलाड़ियों के लिए एक व्यापक फील्डिंग कार्यक्रम तैयार करना, अभ्यास सत्र आयोजित करना और व्यक्तिगत कोचिंग देना शामिल है। इसके अलावा, कोच को तकनीक की मदद से खिलाड़ियों के प्रदर्शन का विश्लेषण कर उनकी ताकत और कमजोरियों की पहचान करनी होगी और प्रदर्शन के लक्ष्य निर्धारित करने होंगे।
आवेदन करने के लिए उम्मीदवार को कुछ निर्धारित मानदंडों में से कम से कम एक पूरा करना होगा: भारत या किसी अन्य देश का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिनिधित्व, या कम से कम 30 फर्स्ट-क्लास मैच खेलने के साथ BCCI लेवल 'बी' कोचिंग सर्टिफिकेशन, या किसी अंतरराष्ट्रीय/राज्य स्तरीय/टी20 फ्रेंचाइजी टीम को कोचिंग देने का अनुभव।
पुरुष टीम के लिए हेड फिजियोथेरेपिस्ट की जिम्मेदारी
वहीं, सीनियर पुरुष टीम के हेड फिजियोथेरेपिस्ट की मुख्य जिम्मेदारी खिलाड़ियों की चोटों का प्रबंधन, उनकी रोकथाम और प्रदर्शन को बेहतर बनाने की होगी। इस भूमिका में मैच के दिन फिजियोथेरेपी सहायता देना, चोटों का निदान करना और उनके इलाज व पुनर्वास (रिहैबिलिटेशन) के लिए योजनाएं बनाना शामिल होगा। चयनित उम्मीदवार BCCI की स्पोर्ट्स साइंस एंड मेडिसिन टीम, कोचिंग स्टाफ और अन्य विशेषज्ञों के साथ मिलकर काम करेंगे। उन्हें खिलाड़ियों के वर्कलोड की निगरानी करनी होगी और विस्तृत क्लिनिकल रिकॉर्ड भी बनाए रखना होगा।
इनपुट: IANS


