फीफा के विवादित FFE प्लान वापस लेने के बाद भी UEFA सख्त, कानूनी कार्रवाई के लिए दस्तावेज सुरक्षित रखने का नोटिस भेजा
फुटबॉल की दुनिया में एक बड़ा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। फीफा अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो भले ही अपने महत्वाकांक्षी 'फीफा फॉरवर्ड एंटरप्राइज' (FFE) प्रस्ताव को वापस ले चुके हों, लेकिन यूरोपीय…
फुटबॉल की दुनिया में एक बड़ा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। फीफा अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो भले ही अपने महत्वाकांक्षी 'फीफा फॉरवर्ड एंटरप्राइज' (FFE) प्रस्ताव को वापस ले चुके हों, लेकिन यूरोपीय फुटबॉल की शासी निकाय UEFA इस मामले को छोड़ने के मूड में नहीं है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के मुताबिक, UEFA ने अब फीफा को एक कानूनी 'प्रिजर्वेशन नोटिस' भेजा है, जिसमें इस रद्द हो चुके प्रोजेक्ट से जुड़े सभी दस्तावेजों को सुरक्षित रखने की मांग की गई है।
यह कदम इस बात का संकेत है कि UEFA भविष्य में फीफा के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने का विकल्प खुला रख रहा है। हालांकि UEFA ने इस मामले पर विस्तृत टिप्पणी करने से इनकार कर दिया, लेकिन अल जजीरा से पुष्टि की कि यह पत्र भेजा गया है। इस नोटिस का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जब तक यूरोपीय निकाय अपनी अगली कार्रवाई तय नहीं कर लेता, तब तक प्रोजेक्ट से संबंधित कोई भी रिकॉर्ड नष्ट न किया जाए।
क्या था पूरा विवाद?
यह सारा विवाद फीफा के उस प्रस्ताव से शुरू हुआ था, जिसमें 'फीफा फॉरवर्ड एंटरप्राइज' नाम की एक कमर्शियल सहायक कंपनी बनाने की योजना थी। इस कंपनी का काम फीफा वर्ल्ड कप जैसे बड़े टूर्नामेंटों के कमर्शियल अधिकारों का प्रबंधन करना होता। सबसे अहम बात यह थी कि इस योजना के तहत निजी निवेशकों को भी इक्विटी हिस्सेदारी खरीदने की अनुमति दी जाती।
फीफा का तर्क था कि इस पहल से उसके 211 सदस्य संघों के लिए विकास निधि में भारी बढ़ोतरी होगी। हालांकि, इस प्रस्ताव का UEFA, कॉनकाकाफ (CONCACAF), एशियाई फुटबॉल परिसंघ (AFC) और कई राष्ट्रीय फुटबॉल संघों ने कड़ा विरोध किया। उन्होंने इस योजना की पारदर्शिता और परामर्श प्रक्रिया में कमी पर गंभीर सवाल उठाए थे।
भारी विरोध के बाद फीफा ने खींचे थे हाथ
व्यापक विरोध के बाद, फीफा अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो ने कुछ दिन पहले ही इस प्रस्ताव को छोड़ने की घोषणा की थी। उन्होंने स्वीकार किया था कि हितधारकों से मिली प्रतिक्रिया ने स्पष्ट कर दिया कि यह प्रोजेक्ट विवाद का एक बड़ा कारण बन गया था। इन्फेंटिनो के अनुसार, यह प्रस्ताव अब विश्व फुटबॉल को मजबूत करने के अपने मूल उद्देश्य को पूरा नहीं कर रहा था, जिसके चलते इसे रद्द कर दिया गया।
इनपुट: IANS


