एशियन गेम्स: तानों को मेडल से जवाब! जानिए कौन हैं पोल वॉल्टर बारानिका इलांगोवन
तमिलनाडु के एक छोटे से गांव से निकलकर एशियन गेम्स के पोडियम तक का सफर तय करने वाली बारानिका इलांगोवन की कहानी प्रेरणा और दृढ़ संकल्प की मिसाल है। शुक्रवार को नागोया में हुए 2026 एशियन गेम्स में…
तमिलनाडु के एक छोटे से गांव से निकलकर एशियन गेम्स के पोडियम तक का सफर तय करने वाली बारानिका इलांगोवन की कहानी प्रेरणा और दृढ़ संकल्प की मिसाल है। शुक्रवार को नागोया में हुए 2026 एशियन गेम्स में उन्होंने पोल वॉल्ट स्पर्धा में 4.20 मीटर की ऊंचाई पार कर भारत के लिए ऐतिहासिक कांस्य पदक जीता। लेकिन इस जीत के पीछे एक लंबा संघर्ष है, जिसमें उन्हें गांव वालों के ताने भी सुनने पड़े, जो कहते थे कि चोट लग गई तो उनसे कोई शादी नहीं करेगा।
समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, 24 वर्षीय बारानिका ने जब इस जोखिम भरे खेल को चुना, तो उनके माता-पिता को भी कई बातें सुननी पड़ीं। लेकिन उन्होंने और उनके कोच ने बारानिका की काबिलियत पर पूरा भरोसा जताया। यही वजह है कि पदक जीतने के बाद भावुक बारानिका ने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता के भरोसे, कोच के विश्वास और एथलेटिक्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (AFI) के समर्थन को दिया।
“कोई शादी नहीं करेगा”: जब समाज ने उठाए सवाल
बारानिका ने पदक जीतने के बाद IANS को बताया, "मैं एक गांव से आती हूं। जब मैंने शुरुआत की, तो 2019 में वॉल्टिंग के दौरान चोट लगने के बाद मेरी एसीएल सर्जरी हुई थी। उस समय हर कोई मेरे माता-पिता से कह रहा था, लड़की को पोल वॉल्ट में हिस्सा क्यों लेने दे रहे हो? यह इवेंट काफी जोखिम भरा है। अगर उसे कुछ हो गया, तो कोई उससे शादी नहीं करेगा।"
उन्होंने आगे कहा, "वे हमारी पीठ पीछे बातें कर रहे थे मगर मेरे मम्मी-पापा को मुझ पर भरोसा था। मेरे कोच ने उनसे कहा, 'वह आपकी सोच से कहीं ज्यादा कर दिखाएगी। वह निश्चित रूप से खेल में नाम कमाएगी।' मैं उनका भी शुक्रिया अदा करना चाहती हूं, क्योंकि उन्होंने दूसरों की बात नहीं सुनी। उन्होंने मुझ पर भरोसा किया।"
जीत का वह पल, जिसका यकीन नहीं हुआ
दिलचस्प बात यह है कि बारानिका को तुरंत पता ही नहीं चला कि उन्होंने मेडल जीत लिया है। कजाकिस्तान की एक एथलीट के साथ तीसरे स्थान पर टाई होने के कारण उन्हें कुछ भ्रम हुआ। उन्होंने बताया, "मुझे यकीन ही नहीं हुआ कि मैंने मेडल जीत लिया है। मेरी साथी एथलीट मेरे पास आई और कहा, 'तुम ब्रॉन्ज मेडल की हकदार हो, तुमने इसे जीत लिया है।'" तब जाकर उन्हें पता चला कि उनका प्रदर्शन पोडियम फिनिश के लिए काफी था।
AFI के समर्थन ने दिलाई मदद
बारानिका ने अपनी सफलता में एथलेटिक्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (AFI) के योगदान को भी रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि फेडरेशन ने उनके पोल्स को जापान तक पहुंचाने के लिए हर संभव प्रयास किया और प्रतियोगिता से पहले सुगुपा यूनिवर्सिटी में एक तैयारी कैंप भी लगाया। इस कैंप की मदद से उन्हें जापान के माहौल, समय और खान-पान से तालमेल बिठाने में काफी मदद मिली, जो अंततः पदक जीतने में सहायक साबित हुआ।
इनपुट: IANS


