हॉकी विश्व कप 2026: कप्तान सलीमा टेटे का बड़ा सपना, 'इस बार फाइनल खेलना चाहते हैं'
अगस्त 2026 में बेल्जियम और नीदरलैंड की संयुक्त मेजबानी में होने वाले FIH महिला हॉकी वर्ल्ड कप के लिए भारतीय टीम पूरी तरह से तैयार है। समाचार एजेंसी IANS के साथ एक खास बातचीत में टीम की कप्तान सलीमा…
अगस्त 2026 में बेल्जियम और नीदरलैंड की संयुक्त मेजबानी में होने वाले FIH महिला हॉकी वर्ल्ड कप के लिए भारतीय टीम पूरी तरह से तैयार है। समाचार एजेंसी IANS के साथ एक खास बातचीत में टीम की कप्तान सलीमा टेटे ने इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट को लेकर अपनी उम्मीदें और टीम की रणनीति साझा की। उन्होंने कहा कि टीम का लक्ष्य सिर्फ अच्छा प्रदर्शन करना नहीं, बल्कि इस बार फाइनल तक पहुंचना है।
एफआईएच नेशंस कप में सलीमा टेटे की अगुवाई में भारतीय टीम ने एक भी मैच हारे बिना खिताब जीता था, जिससे टीम का आत्मविश्वास काफी बढ़ा हुआ है। अब यही लय विश्व कप में भी बरकरार रखने का इरादा है।
पहली बार वर्ल्ड कप में कप्तानी का अनुभव
कप्तान के तौर पर अपने पहले विश्व कप को लेकर सलीमा ने उत्साह और थोड़ी घबराहट दोनों जाहिर की। उन्होंने कहा, "यह मेरे लिए बहुत खास एहसास है। बेशक, मैं उत्साहित हूं, लेकिन थोड़ी नर्वस भी हूं क्योंकि यह हॉकी का सबसे बड़ा टूर्नामेंट है और भारत की कप्तानी करना एक बड़ी जिम्मेदारी है।" उन्होंने आगे कहा, "पिछले वर्ल्ड कप में हमने अच्छा हॉकी खेला था, लेकिन नतीजे हमारी उम्मीद के मुताबिक नहीं रहे। इस बार हम सभी और आगे जाने और फाइनल तक पहुंचने की बात कर रहे हैं। यही सपना हम सब देखते हैं।"
युवा और अनुभव का सही संतुलन
टीम में युवा और अनुभवी खिलाड़ियों के बेहतरीन तालमेल को लेकर सलीमा ने बताया कि टीम की सबसे बड़ी ताकत आपसी संवाद है। उन्होंने कहा, "युवा खिलाड़ी सीनियर खिलाड़ियों से बात करने में कभी नहीं हिचकिचातीं... सभी अनुभवी खिलाड़ी हमेशा उन्हें गाइड करने और सपोर्ट करने के लिए तैयार रहते हैं।" उन्होंने जोर दिया कि विश्व कप जैसे बड़े मंच पर एकजुट होकर खेलना और एक-दूसरे पर भरोसा करना ही दबाव को संभालने का सबसे अच्छा तरीका है।
चीन के खिलाफ पहला मुकाबला और टीम को संदेश
विश्व कप में भारतीय टीम पूल डी में है, जहां उसका पहला मुकाबला 16 अगस्त को चीन से होगा। इसके बाद टीम 18 अगस्त को दक्षिण अफ्रीका और 20 अगस्त को इंग्लैंड से भिड़ेगी। चीन के खिलाफ पहले मैच को लेकर कप्तान का संदेश साफ है। उन्होंने कहा, "हम इस चुनौती के लिए तैयार हैं... हम अपने स्टाइल में हॉकी खेलना चाहते हैं। सबसे जरूरी बात, मैं चाहती हूं कि हर खिलाड़ी आखिरी सेकंड तक लड़े।"
दबाव को सकारात्मक रूप में लेने की रणनीति
सलीमा का मानना है कि विश्व कप में सबसे बड़ी चुनौती बाहरी दबाव को स्वीकार कर उसे सकारात्मक ऊर्जा में बदलना है। उन्होंने कहा, "हमारे लिए सबसे बड़ी चुनौती दबाव की चिंता करने के बजाय उसे स्वीकार करना है। हम दबाव को सकारात्मक रूप से लेने में विश्वास करते हैं।" उन्होंने युवा खिलाड़ियों को सलाह दी कि वे खुद पर भरोसा रखें और खुलकर खेलें, क्योंकि गलतियां खेल का हिस्सा हैं। टीम के लिए सबसे बड़ी प्रेरणा भारत का प्रतिनिधित्व करना है, और कोच सोजर्ड मारिजने की देखरेख में टीम अपनी तैयारियों को अंतिम रूप दे रही है।
इनपुट: IANS


