मंगलवार, 3 नवम्बर 2026 · नई दिल्ली
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खेतों से कॉमनवेल्थ गेम्स के पोडियम तक: वेटलिफ्टर हरजिंदर कौर के संघर्ष और सफलता की कहानी

पंजाब के पटियाला जिले के एक किसान परिवार में जन्मीं हरजिंदर कौर आज भारतीय महिला वेटलिफ्टिंग का एक जाना-पहचाना नाम बन चुकी हैं। उन्होंने लगातार दो कॉमनवेल्थ गेम्स में पदक जीतकर देश का मान बढ़ाया है…

खेतों से कॉमनवेल्थ गेम्स के पोडियम तक: वेटलिफ्टर हरजिंदर कौर के संघर्ष और सफलता की कहानी
(फोटो: IANS)

पंजाब के पटियाला जिले के एक किसान परिवार में जन्मीं हरजिंदर कौर आज भारतीय महिला वेटलिफ्टिंग का एक जाना-पहचाना नाम बन चुकी हैं। उन्होंने लगातार दो कॉमनवेल्थ गेम्स में पदक जीतकर देश का मान बढ़ाया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, हरजिंदर ने यह सफलता आर्थिक मुश्किलों और खेल में देर से शुरुआत करने जैसी चुनौतियों को पार करते हुए हासिल की है।

दिलचस्प बात यह है कि वेटलिफ्टिंग हरजिंदर का पहला प्यार नहीं था। शुरुआत में वह कबड्डी खेलती थीं और इसके प्रशिक्षण के लिए हर दिन 5 किलोमीटर साइकिल चलाकर सेंटर जाती थीं। हालांकि, परिवार की कमजोर आर्थिक स्थिति के कारण उन्हें अपना प्रशिक्षण बीच में ही छोड़ना पड़ा।

देर से की शुरुआत, पर दमदार प्रदर्शन

हरजिंदर ने वेटलिफ्टिंग की दुनिया में काफी देर से, साल 2016 में कदम रखा। उस वक्त वह पटियाला की पंजाबी यूनिवर्सिटी में पढ़ाई कर रही थीं। एक बार खेल में आने के बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन के दम पर उन्हें अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व करने का अवसर मिला।

उन्होंने 2021 में ताशकंद में हुई कॉमनवेल्थ वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप में महिलाओं के 71 किलोग्राम वर्ग में रजत पदक अपने नाम किया। इसके ठीक एक साल बाद, 2022 में बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स में उन्होंने इसी भारवर्ग में कांस्य पदक जीतकर अपनी काबिलियत साबित की। हाल ही में ग्लासगो में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भी उन्होंने 69 किलोग्राम भारवर्ग में रजत पदक जीता है।

एशियाई खेलों में निराशा और भविष्य की प्रेरणा

हालांकि, हर सफर में उतार-चढ़ाव आते हैं। हरजिंदर एशियन गेम्स 2026 में भारतीय दल का हिस्सा थीं, लेकिन जापान के आइची-नागोया में वह पदक जीतने से चूक गईं और 69 किलोग्राम भारवर्ग में नौवें स्थान पर रहीं। उन्होंने इस पर अफ़सोस भी जताया था। इसी प्रतियोगिता में मीराबाई चानू ने स्वर्ण पदक जीता था, जिन्हें हरजिंदर अपनी प्रेरणा मानती हैं और उन्हीं की तरह सफलता पाने का लक्ष्य रखती हैं।

इनपुट: IANS

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News4Social स्पोर्ट्स डेस्क

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