रविवार, 30 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
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यश की 'टॉक्सिक' का रिव्यू: एक्शन और इमोशन का दमदार कॉकटेल, चौंका देगा क्लाइमेक्स

यश और कियारा आडवाणी की बहुप्रतीक्षित फिल्म 'टॉक्सिक: ए फेयरी टेल फॉर ग्रोन-अप्स' सिर्फ एक एक्शन या गैंगस्टर मूवी नहीं, बल्कि रिश्तों, प्यार, वफादारी और भावनाओं की कई परतों को समेटे एक मुकम्मल सिनेमाई…

यश की 'टॉक्सिक' का रिव्यू: एक्शन और इमोशन का दमदार कॉकटेल, चौंका देगा क्लाइमेक्स
(फोटो: IANS)

यश और कियारा आडवाणी की बहुप्रतीक्षित फिल्म 'टॉक्सिक: ए फेयरी टेल फॉर ग्रोन-अप्स' सिर्फ एक एक्शन या गैंगस्टर मूवी नहीं, बल्कि रिश्तों, प्यार, वफादारी और भावनाओं की कई परतों को समेटे एक मुकम्मल सिनेमाई अनुभव है। समाचार एजेंसी IANS की एक समीक्षा के अनुसार, 3 घंटे 14 मिनट की यह फिल्म अपने दमदार किरदारों और अप्रत्याशित कहानी से दर्शकों को अंत तक बांधे रखती है।

फिल्म की कहानी राया नाम के एक गैंगस्टर और उसके बेटे टिकट के इर्द-गिर्द घूमती है, जिनकी दोहरी भूमिका में यश ने शानदार काम किया है। एक तरफ जहाँ राया गैंगस्टर की दुनिया का चेहरा है, वहीं टिकट कहानी में भावनात्मक गहराई जोड़ता है। निर्देशक गीतू मोहनदास ने अपनी खास कहानी कहने की शैली और विजुअल्स से एक भव्य दुनिया रची है, जिसकी असली ताकत किरदारों के आपसी रिश्तों में है।

कहानी में हर किरदार है खास

फिल्म धीरे-धीरे अपने किरदारों और उनके इरादों को सामने लाती है। नयनतारा (गंगा) और कियारा आडवाणी (नादिया) कहानी को इमोशनल टच देती हैं, तो वहीं हुमा कुरैशी (एलिजाबेथ) अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराती हैं। समीक्षा के मुताबिक, रुक्मिणी वसंत (मेलिसा) का किरदार एक सरप्राइज पैकेज की तरह है जो पर्दे पर अपनी छाप छोड़ता है। इनके अलावा तारा सुतारिया, अक्षय ओबेरॉय और सुदेव नायर जैसे कलाकारों ने भी कहानी को और परतदार बनाया है।

एक्शन और इमोशन का संतुलन

फिल्म का पहला हिस्सा किरदारों को स्थापित करने और ड्रामा रचने में समय लेता है और एक जबरदस्त इंटरवल पर खत्म होता है। दूसरा हिस्सा कहानी को एक नए स्तर पर ले जाता है, जहाँ एक्शन और हिंसा बढ़ जाती है। हालांकि, इतने एक्शन के बीच भी फिल्म अपने भावनात्मक पक्ष को नहीं छोड़ती। राया, टिकट, गंगा और नादिया के रिश्ते कहानी के साथ जुड़े रहते हैं।

चौंकाने वाला क्लाइमेक्स और दमदार निर्देशन

निर्देशक गीतू मोहनदास दर्शकों को हर बात सीधे नहीं बतातीं, बल्कि उन्हें कहानी के मोड़ खुद समझने का मौका देती हैं। जब लगता है कि कहानी की दिशा समझ आ गई है, तभी एक नया मोड़ सामने आ जाता है। फिल्म का क्लाइमेक्स पूरी तरह से अप्रत्याशित है, जो खत्म होने के बाद भी दर्शकों के जेहन में बना रहता है। इस फिल्म को 4.5/5 की रेटिंग दी गई है, जिसमें यश के अभिनय और गीतू के निर्देशन की खासतौर पर तारीफ की गई है।

इनपुट: IANS

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