मंगलवार, 3 नवम्बर 2026 · नई दिल्ली
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भारत की हॉकी टीम में कैसे मिलता है मौका? जानिए चयन की पूरी प्रक्रिया

हाल के एशियन गेम्स में भारतीय पुरुष और महिला हॉकी टीमों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 28 साल बाद एक साथ स्वर्ण पदक अपने नाम किया। इस कामयाबी के बाद कई युवा खिलाड़ियों और प्रशंसकों के मन में यह सवाल…

भारत की हॉकी टीम में कैसे मिलता है मौका? जानिए चयन की पूरी प्रक्रिया
(फोटो: IANS)

हाल के एशियन गेम्स में भारतीय पुरुष और महिला हॉकी टीमों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 28 साल बाद एक साथ स्वर्ण पदक अपने नाम किया। इस कामयाबी के बाद कई युवा खिलाड़ियों और प्रशंसकों के मन में यह सवाल उठता है कि राष्ट्रीय टीम तक पहुंचने का रास्ता क्या है? समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय हॉकी टीम में चयन की प्रक्रिया कई चरणों से होकर गुजरती है, जिसकी शुरुआत जिला स्तर से होती है।

हॉकी में दिलचस्पी रखने वाले किसी भी खिलाड़ी के लिए पहला कदम अपने जिले की टीम में जगह बनाना होता है। वहां लगातार अच्छे प्रदर्शन के बाद ही राज्य की टीम के दरवाजे खुलते हैं। हॉकी इंडिया प्रतिभाओं को खोजने और परखने के लिए जिला और राज्य स्तर पर कई टूर्नामेंट आयोजित करता है।

सबसे अहम टूर्नामेंट: सीनियर नेशनल चैंपियनशिप

राष्ट्रीय टीम में चयन के लिहाज से सबसे महत्वपूर्ण घरेलू टूर्नामेंट सीनियर नेशनल हॉकी चैंपियनशिप को माना जाता है। इसी टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ी चयनकर्ताओं का ध्यान अपनी ओर खींचते हैं, जिसके बाद उन्हें नेशनल कैंप के ट्रायल के लिए बुलाया जाता है। पहली बार 1928 में आयोजित हुई इस चैंपियनशिप को पहले रंगास्वामी कप के नाम से जाना जाता था, लेकिन 2011 में इसका नाम बदल दिया गया।

टूर्नामेंट का ढाँचा कैसा है?

सीनियर नेशनल हॉकी चैंपियनशिप में राज्य, केंद्र शासित प्रदेश और रेलवे व सेना जैसे विभिन्न विभागों की कुल 29 टीमें हिस्सा लेती हैं। इन टीमों को उनके पिछले साल के प्रदर्शन के आधार पर तीन डिवीजनों में बांटा जाता है:

  • डिवीजन A: इसमें शीर्ष 12 टीमें होती हैं, जिन्हें चार पूल में बांटा जाता है। हर पूल से दो टीमें क्वार्टर फाइनल में पहुंचती हैं।
  • डिवीजन B: इसमें 10 टीमें होती हैं और उनका लक्ष्य शीर्ष पर रहकर अगले साल डिवीजन A में प्रमोशन पाना होता है।
  • डिवीजन C: इसमें 7 टीमें होती हैं, जो डिवीजन B में प्रमोशन के लिए प्रतिस्पर्धा करती हैं।

इस चैंपियनशिप के अलावा, हॉकी इंडिया लीग भी राष्ट्रीय टीम में जगह बनाने का एक अहम मंच बन गई है। इन टूर्नामेंटों से चुने गए खिलाड़ियों को एक कैंप में भेजा जाता है, जहाँ उनकी तकनीक, फिटनेस और खेल की समझ का आकलन करने के बाद ही उन्हें भारतीय टीम में शामिल किया जाता है। साथ ही, अब सरकार भी स्कूल स्तर पर हॉकी प्रतिभाओं को पहचानने और उन्हें बढ़ावा देने की पहल कर रही है, जिससे भविष्य में और बेहतर नतीजे आने की उम्मीद है।

इनपुट: IANS

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News4Social स्पोर्ट्स डेस्क

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