एक हादसा जिसने बनाया चैंपियन: पैरा-एथलीट अजीत सिंह की कहानी, जन्मदिन पर विशेष
एक जानलेवा ट्रेन हादसे में अपना बायां हाथ गंवाने के बाद भी हिम्मत न हारने वाले अजीत सिंह यादव आज पैरा-एथलेटिक्स में भारत का चमकता सितारा हैं। उत्तर प्रदेश के इटावा में 5 सितंबर 1993 को जन्मे अजीत ने…
एक जानलेवा ट्रेन हादसे में अपना बायां हाथ गंवाने के बाद भी हिम्मत न हारने वाले अजीत सिंह यादव आज पैरा-एथलेटिक्स में भारत का चमकता सितारा हैं। उत्तर प्रदेश के इटावा में 5 सितंबर 1993 को जन्मे अजीत ने अपनी कमजोरी को ही अपनी सबसे बड़ी ताकत बना लिया और भाला फेंक (जैवलिन थ्रो) में देश के लिए कई अंतरराष्ट्रीय पदक जीते।
समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, साल 2017 में एक ट्रेन दुर्घटना में अपने दोस्त की जान बचाते हुए अजीत को अपनी कोहनी के नीचे का बायां हाथ खोना पड़ा था। इस हादसे के बाद उन्होंने जैवलिन को चुना और अपने दृढ़ संकल्प के दम पर नई ऊंचाइयों को छुआ।
अंतरराष्ट्रीय मंच पर अजीत का दबदबा
अजीत सिंह ने हाल ही में 2024 के पेरिस पैरालंपिक खेलों में F46 श्रेणी में 65.62 मीटर के शानदार थ्रो के साथ रजत पदक हासिल कर देश का मान बढ़ाया। यह उनके सफल करियर की अकेली उपलब्धि नहीं है। उन्होंने 2023 में विश्व पैरा चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक, जबकि 2019 और 2024 के संस्करणों में कांस्य पदक अपने नाम किए। इसके अलावा, उन्होंने 2022 के एशियन पैरा गेम्स में भी कांस्य पदक जीता था। अजीत को भारत सरकार ने 2025 में प्रतिष्ठित अर्जुन पुरस्कार से भी सम्मानित किया।
जन्मदिन पर याद: क्रिकेटर फिरोज पालिया
5 सितंबर को ही एक और भारतीय खिलाड़ी, क्रिकेटर फिरोज एडुल्जी पालिया का भी जन्मदिन होता है। 1910 में बॉम्बे (अब मुंबई) में जन्मे पालिया को भारत के लिए केवल दो टेस्ट मैच खेलने का मौका मिला। उन्होंने अपना पहला टेस्ट 1932 में और दूसरा 1936 में, दोनों ही इंग्लैंड के खिलाफ लॉर्ड्स के मैदान पर खेला था।
हालांकि उनका अंतरराष्ट्रीय करियर छोटा रहा, लेकिन घरेलू क्रिकेट में वे एक बड़ा नाम थे। बाएं हाथ के बल्लेबाज और स्पिन गेंदबाज पालिया ने 100 प्रथम श्रेणी मैचों में 4,536 रन बनाने के साथ-साथ 208 विकेट भी लिए। 9 सितंबर 1981 को 71 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया।
इनपुट: IANS


