भिवानी की जैस्मिन लंबोरिया: लड़कों संग ट्रेनिंग से कॉमनवेल्थ गेम्स के गोल्ड तक का सफर
हरियाणा के 'लिटिल क्यूबा' कहे जाने वाले भिवानी से निकलीं मुक्केबाज जैस्मिन लंबोरिया ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में स्वर्ण पदक जीतकर एक बार फिर देश का नाम रोशन किया है। यह जीत उस सफर का शानदार पड़ाव है…
हरियाणा के 'लिटिल क्यूबा' कहे जाने वाले भिवानी से निकलीं मुक्केबाज जैस्मिन लंबोरिया ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में स्वर्ण पदक जीतकर एक बार फिर देश का नाम रोशन किया है। यह जीत उस सफर का शानदार पड़ाव है, जिसकी शुरुआत सामाजिक बाधाओं और लड़कों के साथ अभ्यास करने की चुनौतियों के बीच हुई थी।
समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, 30 अगस्त 2001 को जन्मी जैस्मिन के लिए बॉक्सिंग को करियर बनाना आसान नहीं था। एक लड़की होने के नाते उन्हें शुरुआती दौर में परिवार और समाज की रूढ़िवादी सोच का सामना करना पड़ा। लेकिन जब उन्होंने रिंग में अपनी प्रतिभा साबित करनी शुरू की, तो सभी का विश्वास जीत लिया। बाद में उन्हें अपने चाचा संदीप और परविंदर का भी भरपूर सहयोग मिला, जो खुद बॉक्सिंग में राष्ट्रीय स्तर के विजेता रह चुके हैं।
चुनौतियों ने बनाया और मजबूत
जैस्मिन के दृढ़ निश्चय का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जब उन्होंने भिवानी की लैंबोरिया बॉक्सिंग अकादमी में प्रशिक्षण शुरू किया, तो वहां कोई और महिला मुक्केबाज नहीं थी। इस चुनौती से घबराने के बजाय, उन्होंने लड़कों के साथ ही अभ्यास किया, जिसने उनकी तकनीक और आत्मविश्वास को और निखारा।
अंतरराष्ट्रीय मंच पर लगातार सफलता
पिछले कुछ वर्षों में जैस्मिन ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार अपनी छाप छोड़ी है। उन्होंने 2021 में दुबई में आयोजित एशियन बॉक्सिंग चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीता था। इसके बाद 2022 के बर्मिंघम राष्ट्रमंडल खेलों में उन्होंने 60 किग्रा वर्ग में कांस्य अपने नाम किया। 2025 में अस्ताना में हुए विश्व बॉक्सिंग कप में स्वर्ण पदक जीतकर उन्होंने अपनी श्रेष्ठता साबित की। अब कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में 57 किग्रा भारवर्ग में जीता गया स्वर्ण पदक उनकी सफलताओं की नई कड़ी है। 25 साल की हो रहीं जैस्मिन से अब एशियन गेम्स और ओलंपिक में भी पदक की उम्मीदें बढ़ गई हैं।
इनपुट: IANS


