सोमवार, 2 नवम्बर 2026 · नई दिल्ली
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एशियन गेम्स में फिर गोल्ड: जानिए भारत में कबड्डी के 4000 साल पुराने दबदबे की वजह क्या है

एशियन गेम्स 2026 में एक बार फिर भारत की महिला और पुरुष कबड्डी टीमों ने स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, दोनों ही टीमों ने फाइनल में ईरान को हराकर यह उपलब्धि हासिल की, जो…

एशियन गेम्स में फिर गोल्ड: जानिए भारत में कबड्डी के 4000 साल पुराने दबदबे की वजह क्या है
(फोटो: IANS)

एशियन गेम्स 2026 में एक बार फिर भारत की महिला और पुरुष कबड्डी टीमों ने स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, दोनों ही टीमों ने फाइनल में ईरान को हराकर यह उपलब्धि हासिल की, जो इस खेल में भारत के ऐतिहासिक दबदबे को और मज़बूत करता है। यह लगातार दूसरा मौका है जब एशियन गेम्स में भारत की दोनों टीमों ने गोल्ड मेडल जीता है।

कबड्डी में भारत की यह सफलता कोई नई बात नहीं है। यह खेल मूल रूप से भारत का है और माना जाता है कि यहाँ यह लगभग 4,000 सालों से खेला जा रहा है। एशियन गेम्स के इतिहास पर नज़र डालें तो भारतीय पुरुष टीम अब तक 9 स्वर्ण पदक जीत चुकी है, जबकि महिला टीम ने 4 बार स्वर्ण पदक हासिल किया है। यह प्रदर्शन इस खेल में भारत की बेजोड़ महारत को दिखाता है।

भारत में कबड्डी का मज़बूत ढाँचा

भारत में इस खेल की अपार लोकप्रियता और निरंतर सफलता के पीछे एक मज़बूत संरचनात्मक ढाँचा है। देश में कबड्डी को नियंत्रित करने वाली शीर्ष संस्था 'एमेच्योर कबड्डी फेडरेशन ऑफ इंडिया' (AKFI) है, जिसकी स्थापना 1972-73 में हुई थी। यह संस्था राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतियोगिताओं का आयोजन करती है।

AKFI भारतीय ओलंपिक संघ, एशियाई कबड्डी महासंघ और अंतरराष्ट्रीय कबड्डी महासंघ से संबद्ध है। इसके तहत देश के 31 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में राज्य संघ काम करते हैं, जो ज़मीनी स्तर पर प्रतिभाओं को तलाशने और उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर मौके देने का काम करते हैं।

खेल के नियम और प्रकार

भारत और दक्षिण एशिया में कबड्डी मुख्य रूप से दो शैलियों में खेली जाती है—मानक (Standard) और सर्कल (Circle)।

मानक शैली: इसे अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त है और प्रो कबड्डी लीग (PKL), एशियन गेम्स व विश्व कप इसी में खेले जाते हैं। इसमें 12 खिलाड़ियों की टीम होती है, जिसमें 7 मैदान पर होते हैं। यह आयताकार मैट पर खेला जाता है और इसमें 'बाल्क लाइन' और 'बोनस लाइन' जैसे नियम होते हैं।

सर्कल शैली: यह पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों में ज़्यादा लोकप्रिय है। यह खुले मैदान में मिट्टी के गोलाकार कोर्ट पर खेली जाती है। इसमें मैट वाले नियम नहीं होते और टैकल करने का तरीका भी अलग होता है, जिसमें मुख्य रूप से वन-ऑन-वन टैकल किया जाता है।

कबड्डी का अंतरराष्ट्रीय सफ़र

भारत में राष्ट्रीय स्तर पर सीनियर नेशनल कबड्डी चैंपियनशिप और व्यावसायिक प्रो कबड्डी लीग सबसे प्रमुख प्रतियोगिताएं हैं। हालांकि, वैश्विक स्तर पर कबड्डी अभी भी ओलंपिक या कॉमनवेल्थ गेम्स का हिस्सा नहीं बन पाया है, जिसकी वजह कुछ ही देशों में इसकी लोकप्रियता होना है। 1936 के बर्लिन ओलंपिक में इसे एक प्रदर्शन खेल के तौर पर शामिल किया गया था, लेकिन उसके बाद से यह ओलंपिक का हिस्सा नहीं रहा। भारत लगातार इस खेल को कॉमनवेल्थ गेम्स में शामिल करने की वकालत करता रहा है।

इनपुट: IANS

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News4Social स्पोर्ट्स डेस्क

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