रविवार, 30 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
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खेल प्रतिभाओं को तराशने के लिए गुजरात ने लॉन्च किया भारत का पहला 'स्पोर्ट्स जीनोमिक्स प्रोग्राम'

गुजरात ने खेल की दुनिया में एक वैज्ञानिक छलांग लगाते हुए भारत का पहला राज्य-स्तरीय 'स्पोर्ट्स जीनोमिक्स प्रोग्राम' शुरू किया है। इस महत्वाकांक्षी पहल का मकसद एथलीटों की जेनेटिक, शारीरिक और प्रदर्शन…

खेल प्रतिभाओं को तराशने के लिए गुजरात ने लॉन्च किया भारत का पहला 'स्पोर्ट्स जीनोमिक्स प्रोग्राम'
(फोटो: IANS)

गुजरात ने खेल की दुनिया में एक वैज्ञानिक छलांग लगाते हुए भारत का पहला राज्य-स्तरीय 'स्पोर्ट्स जीनोमिक्स प्रोग्राम' शुरू किया है। इस महत्वाकांक्षी पहल का मकसद एथलीटों की जेनेटिक, शारीरिक और प्रदर्शन से जुड़ी विशेषताओं को गहराई से समझना है, ताकि प्रतिभा की पहचान और ट्रेनिंग को और सटीक बनाया जा सके। समाचार एजेंसी IANS के मुताबिक, यह कदम प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश में स्पोर्ट्स साइंस और एथलीट विकास के लिए अपनाए जा रहे सबूत-आधारित दृष्टिकोण का हिस्सा है।

इस प्रोग्राम के तहत, वैज्ञानिकों की टीम एथलीटों के DNA का अध्ययन करेगी ताकि उनकी मांसपेशियों की बनावट, सहनशक्ति, चोट लगने की संभावना और व्यायाम पर शरीर की प्रतिक्रिया जैसे पहलुओं को समझा जा सके। यह पहल 2030 में होने वाले कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए गुजरात की तैयारियों के लिहाज से भी बेहद अहम मानी जा रही है।

वैज्ञानिक चयन और प्रशिक्षण का नया दौर

गुजरात के विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री अर्जुन मोधवाडिया ने बताया, "मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के मार्गदर्शन में, गुजरात बायोटेक्नोलॉजी रिसर्च सेंटर (GBRC) जीनोमिक्स को स्पोर्ट्स साइंस, शरीर विज्ञान और पोषण के साथ जोड़ रहा है।" उन्होंने आगे कहा कि इसका लक्ष्य खेल प्रतिभाओं के लिए एक ज्यादा वैज्ञानिक और सबूतों पर आधारित तरीका बनाना है। पारंपरिक तौर पर प्रतिभा का चयन शारीरिक माप और ट्रायल में प्रदर्शन के आधार पर होता था, लेकिन अब इस प्रक्रिया में जेनेटिक जानकारी को भी शामिल किया जाएगा।

सैंपल इकट्ठा करने का काम शुरू भी हो चुका है। GBRC के वैज्ञानिकों ने पहला बैच गुजरात स्टेट टेनिस एसोसिएशन के खिलाड़ियों से लिया है, जबकि अगला बैच 'विजयी भारत फाउंडेशन' के तीरंदाजी, फेंसिंग, जूडो और शूटिंग के एथलीटों से लिया जाएगा।

क्या है योजना का दायरा?

इस कार्यक्रम का लक्ष्य इस साल 2,000 सैंपल इकट्ठा करना है और अगले पांच सालों में कुल 10,000 सैंपल का होल-जीनोम सीक्वेंसिंग और एनालिसिस करने की योजना है। इस विशाल डेटा से 'गुजरात एथलीट जीनोम डेटाबेस' (G-AGD) तैयार किया जाएगा।

विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग की सचिव पी. भारती के अनुसार, "इस कार्यक्रम में पावर, सहनशक्ति, चोट के जोखिम के साथ-साथ न्यूट्रिजेनोमिक्स, लाइफस्टाइल जीनोमिक्स और व्यक्तित्व से जुड़े गुणों का भी अध्ययन किया जाएगा।" इस डेटा के आधार पर हर एथलीट के लिए व्यक्तिगत ट्रेनिंग और पोषण की रणनीति बनाई जाएगी, जिससे उनके प्रदर्शन को बेहतर करने में मदद मिलेगी।

किन खेलों पर होगा फोकस?

यह प्रोग्राम बहुत व्यापक है और इसमें कई तरह के खेलों को शामिल किया गया है। इनमें एथलेटिक्स, तैराकी, बॉक्सिंग और कुश्ती जैसे व्यक्तिगत खेलों से लेकर फुटबॉल, हॉकी और बास्केटबॉल जैसे टीम गेम भी शामिल हैं। इसके अलावा तीरंदाजी, शूटिंग और शतरंज जैसे कौशल-आधारित खेलों के एथलीटों का भी अध्ययन किया जाएगा। इसमें 14 साल से कम, 14 से 18 साल और 18 साल से अधिक उम्र के खिलाड़ियों को शामिल किया जाएगा, जिसमें राज्य और राष्ट्रीय स्तर के चैंपियंस को प्राथमिकता दी जाएगी।

हालांकि, वैज्ञानिकों ने यह भी साफ किया है कि किसी एक 'स्पोर्ट्स जीन' से सफलता तय नहीं होती। खेल में प्रदर्शन कई जेनेटिक और पर्यावरणीय कारकों का मिला-जुला परिणाम होता है, इसलिए जीनोमिक्स को एथलीट के मूल्यांकन के एक हिस्से के तौर पर ही इस्तेमाल किया जाएगा।

इनपुट: IANS

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News4Social स्पोर्ट्स डेस्क

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