एशियन गेम्स में 44 साल बाद गोल्ड: मिजोरम ने अपनी हॉकी स्टार बेटियों को 80 लाख रुपये देकर सम्मानित किया
एशियन गेम्स में भारतीय महिला हॉकी टीम की ऐतिहासिक जीत में अहम भूमिका निभाने वाली मिजोरम की दो स्टार खिलाड़ियों, लालरेमसियामी और लालथंतलुआंगी का उनके गृह राज्य में भव्य स्वागत किया गया। समाचार एजेंसी…
एशियन गेम्स में भारतीय महिला हॉकी टीम की ऐतिहासिक जीत में अहम भूमिका निभाने वाली मिजोरम की दो स्टार खिलाड़ियों, लालरेमसियामी और लालथंतलुआंगी का उनके गृह राज्य में भव्य स्वागत किया गया। समाचार एजेंसी IANS के मुताबिक, जापान के आइची-नागोया में हुए 2026 के एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक जीतकर लौटी इन दोनों खिलाड़ियों को मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने सम्मानित किया और राज्य सरकार की ओर से 40-40 लाख रुपये की सम्मान राशि देने की घोषणा की।
मुआलपुई के. आर. डेंगथुआमा इंडोर स्टेडियम में आयोजित सम्मान समारोह में मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने इन खिलाड़ियों की उपलब्धि की जमकर सराहना की। उन्होंने मीडिया से कहा, "यह मिजोरम राज्य के साथ-साथ पूरे देश में खेल के क्षेत्र में एक गेम चेंजर साबित होगा।"
फाइनल की हीरो लालरेमसियामी
चीन के खिलाफ हुए रोमांचक फाइनल मुकाबले में भारत ने 1-0 से जीत दर्ज कर स्वर्ण पदक अपने नाम किया था। मैच का एकमात्र और निर्णायक गोल मिजोरम की लालरेमसियामी ने ही 10वें मिनट में दागा था। उनकी इस शानदार गोल की बदौलत भारतीय महिला हॉकी टीम ने 44 साल के लंबे इंतजार को खत्म करते हुए इतिहास रच दिया।
44 साल का लंबा इंतजार
भारतीय महिला हॉकी टीम ने इससे पहले 1982 में अपने पहले ही एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल जीता था। उस वक्त टीम ने दक्षिण कोरिया को हराया था। इसके बाद टीम को दोबारा स्वर्ण पदक जीतने के लिए चार दशकों से ज़्यादा का इंतजार करना पड़ा। इन वर्षों के दौरान टीम दो बार (1998 और 2018) फाइनल तक पहुंची लेकिन रजत पदक से ही संतोष करना पड़ा। इसके अलावा टीम ने 1986, 2006, 2014 और 2022 में कांस्य पदक भी जीते थे।
हॉकी में दोहरा स्वर्ण
एशियन गेम्स के इतिहास में यह पहला मौका है जब भारत की पुरुष और महिला, दोनों हॉकी टीमों ने एक साथ स्वर्ण पदक जीता है। भारतीय पुरुष टीम ने भी फाइनल में मलेशिया को 5-1 से हराकर अपना लगातार दूसरा गोल्ड मेडल हासिल किया।
इनपुट: IANS


