पिता ने नौकरी छोड़ी, क़र्ज़ लिया: जानिए बॉक्सर नीतू घंघास के विश्व चैंपियन बनने का सफ़र
कॉमनवेल्थ गेम्स और वर्ल्ड चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर भारत का नाम रोशन करने वाली मुक्केबाज़ नीतू घंघास की कामयाबी के पीछे उनके पिता के असाधारण त्याग और संघर्ष की कहानी है। समाचार एजेंसी IANS की…
कॉमनवेल्थ गेम्स और वर्ल्ड चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर भारत का नाम रोशन करने वाली मुक्केबाज़ नीतू घंघास की कामयाबी के पीछे उनके पिता के असाधारण त्याग और संघर्ष की कहानी है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, हरियाणा के भिवानी की इस बेटी को बॉक्सर बनाने के लिए उनके पिता जय भगवान ने न सिर्फ अपनी नौकरी से तीन साल की अवैतनिक छुट्टी ली, बल्कि छह लाख रुपये का कर्ज भी उठाया।
नीतू का जन्म 19 अक्टूबर 2000 को भिवानी में हुआ, जिसे 'भारतीय बॉक्सिंग का गढ़' भी कहा जाता है। पिता ने ही उन्हें इस खेल से जोड़ा और महज़ 12 साल की उम्र में उनकी ट्रेनिंग शुरू हो गई। शुरुआती चुनौतियों के कारण नीतू ने खेल छोड़ने तक का मन बना लिया था, लेकिन उनके पिता ने हौसला बनाए रखा और व्यक्तिगत रूप से उनकी ट्रेनिंग व खान-पान की पूरी ज़िम्मेदारी संभाली।
सफ़र और शुरुआती सफलता
नीतू के करियर में एक बड़ा मोड़ तब आया जब उनकी प्रतिभा पर मशहूर कोच जगदीश सिंह की नज़र पड़ी। इसके बाद उन्होंने भिवानी बॉक्सिंग क्लब में ट्रेनिंग शुरू की। अपने पिता के साथ स्कूटर पर रोज़ 40 किलोमीटर का सफ़र तय करके वह ट्रेनिंग सेंटर पहुँचती थीं। इस मेहनत का फल जल्द ही मिला, जब उन्होंने 2017 में यूथ इंटरनेशनल बॉक्सिंग चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीता और 2018 में एशियाई और यूथ चैंपियन बनीं।
चुनौतियों से विश्व विजेता तक
कोविड-19 महामारी के कारण उनके खेल में थोड़ी रुकावट आई, लेकिन उन्होंने 2021 में सीनियर नेशनल चैंपियनशिप जीतकर शानदार वापसी की। 2022 में कॉमनवेल्थ गेम्स के ट्रायल्स में उनका सामना अपनी आदर्श मैरी कॉम से हुआ, जहाँ मैरी कॉम के चोटिल होने के बाद नीतू को जीत मिली। इसी साल उन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण पदक अपने नाम किया।
नीतू ने 2023 में महिला विश्व चैंपियनशिप में भी अपना दबदबा कायम रखा और महज़ 22 साल की उम्र में वर्ल्ड चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया। मुक्केबाज़ी में उनके शानदार योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें 2024 में 'अर्जुन पुरस्कार' से सम्मानित किया।
इनपुट: IANS


