IPL के 'इम्पैक्ट प्लेयर' नियम पर अजिंक्य रहाणे का बड़ा बयान, बोले- इसे तुरंत हटा देना चाहिए
इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) का 'इम्पैक्ट प्लेयर' नियम लागू होने के बाद से ही क्रिकेट जगत में चर्चा का विषय बना हुआ है। अब इस नियम की आलोचना करने वाले खिलाड़ियों की सूची में अनुभवी भारतीय क्रिकेटर…
इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) का 'इम्पैक्ट प्लेयर' नियम लागू होने के बाद से ही क्रिकेट जगत में चर्चा का विषय बना हुआ है। अब इस नियम की आलोचना करने वाले खिलाड़ियों की सूची में अनुभवी भारतीय क्रिकेटर अजिंक्य रहाणे का नाम भी जुड़ गया है। उन्होंने इस नियम को भारतीय क्रिकेट के लिए नुकसानदेह बताते हुए इसे पूरी तरह से हटाने की जोरदार वकालत की है।
समाचार एजेंसी IANS के हवाले से, रहाणे ने 'क्रिकबज' के साथ बातचीत में कहा कि यह नियम किसी काम का नहीं है और इसका कोई वास्तविक फायदा नहीं दिखता। उन्होंने खुलासा किया कि पिछले साल IPL कप्तानों की बैठक में भी ज़्यादातर कप्तान इस नियम के पक्ष में नहीं थे। रहाणे ने कहा, "मुझे लगता है कि इसे हटा दिया जाना चाहिए। ...मुझे लगता है कि यह नियम या गाइडलाइंस 2027 तक लागू हैं। इसलिए हमें नहीं पता कि वे इसे इस साल हटाएंगे या इस साल के बाद होने वाले बड़े ऑक्शन (नीलामी) में हटाएंगे। हालांकि, असल में मुझे लगता है कि 'इम्पैक्ट प्लेयर' नियम का कोई मतलब या फायदा नहीं है।"
ऑलराउंडर्स के विकास में सबसे बड़ी बाधा
रहाणे ने इस नियम के सबसे बड़े नकारात्मक प्रभाव पर जोर देते हुए कहा कि यह भारतीय क्रिकेट में ऑलराउंडर्स के विकास को रोक रहा है। उन्होंने समझाया, "यह नियम भारतीय क्रिकेट में ऑलराउंडर्स के विकास में भी बाधा डाल रहा है, क्योंकि फ्रेंचाइजी बल्लेबाज की जगह गेंदबाज और गेंदबाज की जगह बल्लेबाज को लाकर बल्ले या गेंद से बेहतर नतीजा पाने की कोशिश करती हैं।" उन्होंने आगे कहा, "खासकर आईपीएल में ऑलराउंडर्स खेल से बाहर होते जा रहे हैं। और मेरा पक्का मानना है कि आपको अपने ऑलराउंडर्स को तैयार करना चाहिए।"
इस संदर्भ में यह गौर करने वाली बात है कि हार्दिक पांड्या की कमी के चलते भारतीय टीम को अक्सर एक अच्छे तेज गेंदबाज ऑलराउंडर की तलाश रहती है। हालांकि शिवम दुबे और नीतीश रेड्डी जैसे खिलाड़ी सामने आए हैं, लेकिन वे अभी तक हार्दिक के स्तर तक नहीं पहुंच पाए हैं।
खेल के संतुलन पर असर
अजिंक्य रहाणे का मानना है कि 'इम्पैक्ट प्लेयर' नियम से खेल का संतुलन भी बिगड़ रहा है, जिससे गेंदबाजों को नुकसान होता है। उन्होंने पिछले सीज़न का उदाहरण देते हुए कहा, "पिछले साल मैं किसी टीम का नाम नहीं लेना चाहता, लेकिन कुछ टीमें शायद 90/7 या 100/7 के स्कोर पर थीं, और इस नियम के चलते एक अतिरिक्त बल्लेबाज को उतारकर उन्होंने 200 रन तक बना लिए थे।" रहाणे ने अंत में कहा कि गेंदबाजों को भी कुछ फायदा मिलना चाहिए और ऑलराउंडर्स को खेल में पूरी तरह शामिल होने का मौका मिलना चाहिए, इसलिए इस नियम को खत्म कर देना ही बेहतर है।
इनपुट: IANS


