शनिवार, 1 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
अन्य खेल

कॉमनवेल्थ गेम्स के हीरो रोहित टोकस: स्कूल में मिली एक हार ने कैसे बदल दी ज़िंदगी

कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 में भारत के लिए कांस्य पदक जीतने वाले बॉक्सर रोहित टोकस की कहानी दृढ़ संकल्प और वापसी की एक मिसाल है। दिल्ली के मुनीरका में 1 अगस्त 1993 को जन्मे रोहित का बॉक्सिंग रिंग तक का सफर…

कॉमनवेल्थ गेम्स के हीरो रोहित टोकस: स्कूल में मिली एक हार ने कैसे बदल दी ज़िंदगी
(फोटो: IANS)

कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 में भारत के लिए कांस्य पदक जीतने वाले बॉक्सर रोहित टोकस की कहानी दृढ़ संकल्प और वापसी की एक मिसाल है। दिल्ली के मुनीरका में 1 अगस्त 1993 को जन्मे रोहित का बॉक्सिंग रिंग तक का सफर एक दिलचस्प मोड़ से शुरू हुआ, जब स्कूल में एक सहपाठी से मिली हार ने उन्हें अंदर तक झकझोर दिया। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, इसी हार ने उनमें दोबारा रिंग में उतरने और खुद को साबित करने का जुनून भर दिया।

रोहित के पिता ने उन्हें और उनके भाइयों को बचपन में घर के पास की एक अकादमी में बॉक्सिंग सीखने भेजा था। लेकिन रोहित ने एक-दो साल की ट्रेनिंग के बाद इसे छोड़कर तैराकी शुरू कर दी थी। बाद में जब उनका स्कूल बदला, तो उन्होंने एक सहपाठी को 'शैडो बॉक्सिंग' करते देखा और उसे चैलेंज कर दिया, जिसमें उन्हें करारी शिकस्त मिली। यह हार उन्हें इतनी चुभी कि उन्होंने फिर से बॉक्सिंग शुरू कर दी और दो महीने की कड़ी ट्रेनिंग के बाद दिल्ली राज्य चैंपियनशिप में उसी सहपाठी को हराकर चैंपियन बने।

चोटों से संघर्ष और शानदार वापसी

साल 2010 में दिल्ली कॉमनवेल्थ गेम्स देखने के बाद रोहित ने बॉक्सिंग को ही अपना करियर बनाने का फैसला किया। 2011 में उन्होंने नेशनल बॉक्सिंग चैंपियनशिप में गोल्ड और क्यूबा युवा ओलंपिक में सिल्वर मेडल जीतकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। हालांकि, इसके बाद उनका करियर चोटों से प्रभावित रहा। 2018 में घुटने की चोट के कारण वह क्वालिफाई करने के बावजूद AIBA वर्ल्ड बॉक्सिंग चैंपियनशिप से बाहर हो गए। दो सर्जरी के बाद जब उन्होंने वापसी की तो टोक्यो ओलंपिक की तैयारी के दौरान सेमीफाइनल में फिर उसी घुटने में चोट लग गई।

दर्द को हराकर जीता मेडल

लगातार चोटों से जूझने के बावजूद रोहित ने हार नहीं मानी। कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 के पहले मुकाबले से ठीक पहले भी उनके उसी घुटने में फिर चोट लग गई। फिजियोथेरेपिस्ट की मदद और घुटने पर टेप लगाने से हुए असहनीय फोड़ों के दर्द के बावजूद वह रिंग में उतरे। उन्होंने तमाम बाधाओं को पार करते हुए ब्रॉन्ज मेडल पर 'पंच' लगाकर देश का नाम रोशन किया।

इनपुट: IANS

N

News4Social स्पोर्ट्स डेस्क

News4Social स्पोर्ट्स डेस्क — IANS समेत लाइसेंस-प्राप्त समाचार एजेंसियों की फीड से खेल जगत से जुड़ी ताज़ा व प्रामाणिक खबरें संपादकीय समीक्षा के बाद प्रकाशित करता है। हर खबर उसके स्रोत के श्रेय (credit) के साथ दी जाती है। सभी लेख देखें →

आगे पढ़ें

और देखें →