सानिया मिर्जा को आदर्श मानने वाली 17 साल की माया ने तोड़ा उन्हीं का 22 साल पुराना रिकॉर्ड
17 साल की युवा भारतीय टेनिस खिलाड़ी माया राजेश्वरन रेवती ने नाइजीरिया में अपना पहला प्रोफेशनल सिंगल्स खिताब जीतकर इतिहास रच दिया है। इस जीत के साथ उन्होंने अपनी आदर्श सानिया मिर्जा के 22 साल पुराने…
17 साल की युवा भारतीय टेनिस खिलाड़ी माया राजेश्वरन रेवती ने नाइजीरिया में अपना पहला प्रोफेशनल सिंगल्स खिताब जीतकर इतिहास रच दिया है। इस जीत के साथ उन्होंने अपनी आदर्श सानिया मिर्जा के 22 साल पुराने एक रिकॉर्ड को भी तोड़ दिया। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, माया डब्ल्यू35 सिंगल्स खिताब जीतने वाली सबसे कम उम्र की भारतीय महिला बन गई हैं। लागोस में हुए इस टूर्नामेंट में उन्होंने सिंगल्स और डबल्स, दोनों में खिताबी जीत हासिल की।
दिलचस्प बात यह है कि माया, भारत की महानतम टेनिस खिलाड़ियों में से एक सानिया मिर्जा को अपनी प्रेरणा मानती हैं। जब उनसे सानिया से आगे निकलने के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने इस तुलना को विनम्रता से खारिज कर दिया। माया ने कहा, "मुझे नहीं लगता कि आप असल में उनसे आगे निकल सकते हैं, क्योंकि वह एक लेजेंड हैं और हमेशा लेजेंड ही रहेंगी। जब मैं देश में बड़ी हो रही थी, तब वह मेरी आदर्श थीं। उन्होंने ही इतने वर्षों बाद देश में टेनिस को पहचान दिलाई है।"
लागोस में माया का ऐतिहासिक प्रदर्शन
नाइजीरिया के लागोस में डब्ल्यू35 टूर्नामेंट माया के लिए एक बड़ी सफलता साबित हुआ। टूर्नामेंट से पहले दुनिया में 1038वें स्थान पर रहीं माया ने पहले मेन ड्रॉ के लिए क्वालिफाई किया। इसके बाद उन्होंने पहले ही दौर में टॉप सीड जस्टिना मिकुलस्काइट को हराया और फिर एक के बाद एक ऊंची रैंकिंग वाली खिलाड़ियों को मात दी।
फाइनल में उन्होंने स्पेन की सेलिया सर्विनो रुइज को सीधे सेटों में 6-4, 6-2 से हराकर अपना पहला प्रो सर्किट सिंगल्स खिताब जीता। खास बात यह है कि उन्होंने मेन ड्रॉ में एक भी सेट नहीं गंवाया। इसके अलावा, उन्होंने यूक्रेन की येलीजावेता कोट्लियार के साथ मिलकर डबल्स का खिताब भी अपने नाम किया।
"यह तो बस एक शुरुआत है"
इस बड़ी कामयाबी के बावजूद, माया बेहद विनम्र बनी रहीं। उन्होंने इस जीत को अपने प्रोफेशनल करियर की एक अच्छी शुरुआत बताया। उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि यह बस एक तरह की शुरुआत है क्योंकि यह पहला खिताब है। प्रो करियर शुरू करने के लिए यह एक अच्छा संकेत है। यह निश्चित रूप से एक अच्छी शुरुआत है। हालांकि, मुझे नहीं लगता कि इससे कोई बहुत बड़ी बात होने वाली है, क्योंकि यह बस एक शुरुआत है।"
माया ने बताया कि वह टूर्नामेंट में बिना किसी उम्मीद के उतरी थीं, जिससे उन्हें अपने खेल पर ध्यान केंद्रित करने में मदद मिली। पहले दौर में टॉप सीड खिलाड़ी के खिलाफ एक मैच में वह पहले सेट में 0-5 से पीछे थीं। इसे याद करते हुए उन्होंने कहा, "मेरे दिमाग में सबसे पहली बात यह आई कि मैं 25 मिनट में सेट नहीं हारने वाली। इसी कारण मैंने बस बने रहने की कोशिश की।" इस सोच के साथ उन्होंने न सिर्फ वो सेट 7-5 से जीता, बल्कि मैच भी अपने नाम कर लिया।
इनपुट: IANS


