बैडमिंटन फंडिंग विवाद: SAI ने कहा- एशियन गेम्स का प्रदर्शन नहीं, BAI की देरी है असली वजह
भारतीय बैडमिंटन की फंडिंग में कटौती को लेकर उठे विवाद के बीच भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) ने स्थिति स्पष्ट की है। SAI ने उन रिपोर्ट्स को खारिज कर दिया है जिनमें कहा गया था कि जापान में हुए एशियन गेम्स…
भारतीय बैडमिंटन की फंडिंग में कटौती को लेकर उठे विवाद के बीच भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) ने स्थिति स्पष्ट की है। SAI ने उन रिपोर्ट्स को खारिज कर दिया है जिनमें कहा गया था कि जापान में हुए एशियन गेम्स में पदक न जीत पाने के कारण फंडिंग रोकी गई। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के मुताबिक, साई का कहना है कि असली वजह बैडमिंटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया (BAI) द्वारा समय पर प्रस्ताव जमा न करना था।
यह मामला तब सामने आया जब भारतीय टीम के यूरोपियन दौरे के लिए फंडिंग रोके जाने की खबरें आईं। इस दौरे में फिनलैंड, डेनमार्क, फ्रांस और जर्मनी में लगातार चार टूर्नामेंट शामिल थे। रिपोर्ट्स के अनुसार, खिलाड़ियों को इस फैसले की जानकारी 6 अक्टूबर को दी गई, जो फिनलैंड में आर्कटिक ओपन शुरू होने से कुछ ही दिन पहले था।
देरी पर SAI का सख्त रुख
SAI के एक अधिकारी ने IANS को बताया कि फंडिंग प्रस्ताव जमा करने के लिए 30 दिन की समय-सीमा तय है, जिसे BAI पूरा नहीं कर पाया। अधिकारी ने नियमों में किए गए बदलाव का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, "पहले, महासंघों को 90 दिन पहले बिना नामों के और 60 दिन पहले नामों के साथ प्रस्ताव देना होता था। लेकिन महासंघों के अनुरोध पर इस समय-सीमा को घटाकर 30 दिन कर दिया गया था। इसके बावजूद, हमें समय पर प्रस्ताव नहीं मिला।"
SAI ने साफ कर दिया है कि यह नियम सभी पर लागू होता है और अगर टूर्नामेंट से 30 दिन पहले प्रस्ताव नहीं मिलता है, तो उसे प्रोसेस नहीं किया जाएगा। साई के सूत्रों ने यह भी कहा कि अब महासंघों को भी जिम्मेदारी से काम करना सीखना होगा।
खिलाड़ियों पर क्या पड़ा असर
फंडिंग की इस कमी का सीधा असर खिलाड़ियों पर पड़ा और कुछ को अपने कोच के बिना ही टूर्नामेंट में उतरना पड़ा। उदाहरण के लिए, जब अश्मिता चालिहा ने फ्रेंच ओपन में अकाने यामागुची को हराया, तब उनके साथ कोच की जगह साथी खिलाड़ी इशारानी बरुआ मौजूद थीं। इसी तरह, डेनमार्क में क्वार्टर फाइनल तक पहुंचने वाली तन्वी शर्मा को मैच के दौरान गाइड करने के लिए कोई कोच उपलब्ध नहीं था।
यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब भारतीय खिलाड़ी शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं। हाल ही में, पीवी सिंधु और लक्ष्य सेन ने जर्मनी में हाइलो ओपन 2026 में क्रमशः महिला और पुरुष एकल का खिताब जीता है। चार साल में यह पहला मौका है जब दो भारतीय शटलरों ने एक ही BWF वर्ल्ड टूर इवेंट में सुपर 500 या उससे ऊपर के दो खिताब अपने नाम किए हैं।
इनपुट: IANS


