सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल पर फातिमा और श्वेता तिवारी ने जताई चिंता, कहा- 'उन्हें खोने का जोखिम नहीं उठा सकते'
लद्दाख के मशहूर शिक्षा सुधारक और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल को 19 दिन हो चुके हैं और उनकी सेहत लगातार गिर रही है। इस दौरान उनका वज़न करीब साढ़े आठ किलो कम हो गया है। अब अभिनेत्री…
लद्दाख के मशहूर शिक्षा सुधारक और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल को 19 दिन हो चुके हैं और उनकी सेहत लगातार गिर रही है। इस दौरान उनका वज़न करीब साढ़े आठ किलो कम हो गया है। अब अभिनेत्री फातिमा सना शेख और श्वेता तिवारी ने भी सोशल मीडिया पर उनके स्वास्थ्य को लेकर गहरी चिंता जताई है।
समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, अभिनेत्री फातिमा सना शेख ने गुरुवार को इंस्टाग्राम पर वांगचुक की एक तस्वीर साझा करते हुए लिखा, "सोनम वांगचुक जी के अनशन (भूख हड़ताल) को आज 19 दिन हो गए हैं। हमें तब तक इंतजार नहीं करना चाहिए जब तक कि उनकी तबीयत बहुत ज्यादा बिगड़ न जाए।" उन्होंने आगे कहा, "सोनम जी ने हमारे देश के लिए बहुत बड़े और अच्छे काम किए हैं। अपनी बात सरकार तक पहुंचाने के लिए उन्हें इस तरह अपनी जान दांव पर न लगानी पड़े, ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए।"
छात्रों के भविष्य का सवाल
फातिमा ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी में राजनीति से ऊपर उठकर युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने की बात कही। उन्होंने लिखा, "राजनीति को अलग रखकर देखें तो हमारे युवाओं और छात्रों का भविष्य सुरक्षित करना सबसे जरूरी है। सोनम जी को इस तरह कमजोर होते देखना बेहद दुखद है।" फातिमा ने उम्मीद जताई कि सरकार बातचीत के जरिए जल्द ही इसका शांतिपूर्ण समाधान निकालेगी और युवाओं के बेहतर भविष्य के लिए उनके साथ खड़े होने को सभी का कर्तव्य बताया।
श्वेता तिवारी ने की सरकार से अपील
टीवी अभिनेत्री श्वेता तिवारी ने भी सोनम वांगचुक के उठाए मुद्दे को सही और ज़रूरी बताया। उन्होंने कहा, "सोनम वांगचुक जी शिक्षा और हमारे बच्चों के भविष्य के लिए एक सही और जरूरी मुद्दे के लिए आवाज उठा रहे हैं। इस मुद्दे पर ध्यान दिया जाना चाहिए और सरकार को उनकी चिंताओं को गंभीरता से सुनना चाहिए।"
हालांकि, श्वेता ने यह भी स्पष्ट किया कि वह किसी भी राजनीतिक दल का समर्थन नहीं करतीं। उन्होंने लिखा, "जिस तरह से सीजेपी इस मामले को संभाल रहे हैं, मैं उससे सहमत नहीं हूं। मुझे लगता है कि वे सोनम वांगचुक के संघर्ष का इस्तेमाल अपने एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए कर रहे हैं।" उन्होंने अपना समर्थन सिर्फ वांगचुक और उनके मुद्दे तक सीमित रखा। श्वेता ने अंत में कहा, "हमारे राजनीतिक विचार अलग हो सकते हैं, लेकिन हम ऐसे व्यक्ति को खोने का जोखिम नहीं उठा सकते जिसने अपना जीवन देश और शिक्षा के लिए समर्पित कर दिया है।"
इनपुट: IANS


