मंदिर जा रहे थे, तभी मिली टीम इंडिया में सेलेक्शन की खबर: पढ़ें ऑलराउंडर सारांश जैन का सफ़र
दस साल से ज्यादा के घरेलू क्रिकेट करियर के बाद, मध्यप्रदेश के ऑलराउंडर सारांश जैन को आखिरकार भारतीय टेस्ट टीम में जगह मिल ही गई। 33 वर्षीय सारांश को यह खुशखबरी तब मिली जब वह एक मंदिर जा रहे थे…
दस साल से ज्यादा के घरेलू क्रिकेट करियर के बाद, मध्यप्रदेश के ऑलराउंडर सारांश जैन को आखिरकार भारतीय टेस्ट टीम में जगह मिल ही गई। 33 वर्षीय सारांश को यह खुशखबरी तब मिली जब वह एक मंदिर जा रहे थे। समाचार एजेंसी IANS से साझा किए गए एक वीडियो में उन्होंने उस पल को याद करते हुए बताया कि कैसे उन्हें अपने फोन पर आए कई कॉल्स और मैसेज से अपने चयन के बारे में पता चला।
सारांश ने कहा, "जब मुझे कॉल आया, तो मैं एक मंदिर में था। मैं गाड़ी चला रहा था। मैंने बीच में एक कॉल और मैसेज देखा। इसके बाद मुझे पता चला कि मेरा भारतीय टीम में चयन हो गया है।" यह पहली बार है जब उन्हें भारतीय टीम के लिए चुना गया है। वह 15 अगस्त से गाले में श्रीलंका के खिलाफ शुरू हो रही दो टेस्ट मैचों की सीरीज के लिए टीम का हिस्सा हैं।
टीम में घुलने-मिलने में नहीं हुई दिक्कत
लंबे समय तक घरेलू क्रिकेट खेलने का फायदा सारांश को भारतीय स्क्वॉड में शामिल होने पर मिला। उन्होंने बताया कि टीम के साथ जुड़ने पर उन्हें ज्यादा परेशानी महसूस नहीं हुई, क्योंकि वह पहले से ही ज्यादातर खिलाड़ियों के साथ खेल चुके हैं। उन्होंने कहा, "रणजी ट्रॉफी का एक माहौल होता है। जब मैं तीन दिन पहले टीम में शामिल हुआ, तो मुझे ज्यादा फर्क महसूस नहीं हुआ। मैंने 70-80 प्रतिशत खिलाड़ियों के साथ क्रिकेट खेला है। इसलिए मुझे लगता है कि मैं उन सभी के साथ घुल-मिल गया हूं।"
'सब्र' ही सफलता की कुंजी
सारांश जैन का मानना है कि टेस्ट क्रिकेट में धैर्य यानी सब्र रखना बेहद जरूरी है। उन्होंने अपने सफर को याद करते हुए कहा, "टेस्ट क्रिकेट में आपको सब्र रखना होता है। अगर आप इंडिया के लिए टेस्ट क्रिकेट खेलना चाहते हैं, तो आपको सब्र रखना होगा।" उन्होंने 2014-15 में रणजी ट्रॉफी में डेब्यू किया था और इस लंबे सफर में बहुत मेहनत और त्याग को श्रेय दिया।
बाएं हाथ के इस बल्लेबाज और दाएं हाथ के ऑफ स्पिनर को अपने पिता से भी प्रेरणा मिली, जो खुद रणजी ट्रॉफी खिलाड़ी रह चुके हैं। जैन ने बताया, "मेरा परिवार मेरे साथ रहा है। मेरे पिताजी रणजी ट्रॉफी के खिलाड़ी रहे हैं। उन्होंने कहा है कि सब्र रखो, चीजें अपने आप आपके पास आ जाएंगी।"
शानदार घरेलू रिकॉर्ड
सारांश जैन भारत ए टीम के नियमित सदस्य रहे हैं और उनका प्रथम श्रेणी रिकॉर्ड काफी प्रभावशाली है। उन्होंने 54 मैचों में 2,223 रन बनाए हैं और 188 विकेट भी झटके हैं। उन्होंने मध्यप्रदेश को पहली बार रणजी ट्रॉफी चैंपियन बनाने में भी अहम भूमिका निभाई थी। 2025-26 सीजन में उन्होंने 518 रन बनाने के साथ 30 विकेट लिए थे। इसके अलावा, दलीप ट्रॉफी में सेंट्रल जोन के लिए खेलते हुए उन्होंने दो मैचों में 16 विकेट चटकाए और दो अर्धशतक भी जड़े। अब देखना यह है कि क्या उन्हें श्रीलंका सीरीज में डेब्यू का मौका मिलता है।
इनपुट: IANS


