मंगलवार, 3 नवम्बर 2026 · नई दिल्ली
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कराटे में ब्लैक बेल्ट, क्रिकेट में विस्फोटक बल्लेबाज़: वेदा कृष्णमूर्ति की अनोखी कहानी

भारतीय महिला क्रिकेट टीम की स्टाइलिश बल्लेबाज़ वेदा कृष्णमूर्ति ने अपने करियर में कई यादगार पारियाँ खेली हैं। कर्नाटक के एक छोटे से शहर से निकलकर विश्व कप फाइनल तक का उनका सफर बेहद दिलचस्प रहा है…

कराटे में ब्लैक बेल्ट, क्रिकेट में विस्फोटक बल्लेबाज़: वेदा कृष्णमूर्ति की अनोखी कहानी
(फोटो: IANS)

भारतीय महिला क्रिकेट टीम की स्टाइलिश बल्लेबाज़ वेदा कृष्णमूर्ति ने अपने करियर में कई यादगार पारियाँ खेली हैं। कर्नाटक के एक छोटे से शहर से निकलकर विश्व कप फाइनल तक का उनका सफर बेहद दिलचस्प रहा है, जिसमें क्रिकेट से पहले कराटे में ब्लैक बेल्ट हासिल करना भी शामिल है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, वेदा ने अपने लगभग एक दशक लंबे अंतरराष्ट्रीय करियर में भारत को कई अहम मौकों पर जीत दिलाई।

वेदा कृष्णमूर्ति का जन्म 16 अक्टूबर 1992 को कर्नाटक के चिकमंगलुरु में हुआ था। क्रिकेट का शौक उन्हें बचपन से ही था और वह महज़ तीन साल की उम्र से ही बल्ला थामे गलियों में खेलने लगी थीं। हालांकि, परिवार के दबाव में उन्हें कराटे की ट्रेनिंग भी लेनी पड़ी, जिसमें उन्होंने 12 साल की उम्र तक ब्लैक बेल्ट हासिल कर लिया। इसके ठीक बाद 13 साल की उम्र में उन्होंने औपचारिक रूप से क्रिकेट का प्रशिक्षण शुरू किया और फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।

अंतरराष्ट्रीय करियर और उपलब्धियाँ

वेदा ने जून 2011 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टी20 मैच से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण किया और उसी महीने इंग्लैंड के खिलाफ अपना पहला वनडे मैच खेला। 8 मार्च 2020 को अपना आखिरी अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने वाली वेदा ने भारत के लिए 48 वनडे और 76 टी20 मुकाबले खेले। उन्होंने वनडे में 8 अर्धशतकों की मदद से 829 रन बनाए, जबकि टी20 में उनके नाम 875 रन दर्ज हैं।

उनके करियर की सबसे यादगार पारियों में से एक 2017 महिला विश्व कप में आई, जब उन्होंने न्यूजीलैंड के खिलाफ सिर्फ 45 गेंदों पर 70 रनों की तूफानी पारी खेली थी। वेदा 2017 वनडे विश्व कप और 2020 टी20 विश्व कप का फाइनल खेलने वाली भारतीय टीम की महत्वपूर्ण सदस्य थीं।

संन्यास और क्रिकेट से जुड़ाव

जुलाई 2025 में वेदा कृष्णमूर्ति ने क्रिकेट के सभी प्रारूपों से संन्यास की घोषणा की थी। सोशल मीडिया पर एक भावुक पोस्ट में उन्होंने लिखा, "एक छोटे शहर की लड़की, जिसके सपने बड़े थे... मुझे गर्व है कि संकरी गलियों से दुनिया के बड़े स्टेडियमों तक खेलने का मौका मिला।" उन्होंने आगे कहा कि क्रिकेट ने उन्हें लड़ना, गिरना और खुद को साबित करना सिखाया। क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद भी उनका खेल से जुड़ाव बना हुआ है और अब वह एक क्रिकेट विश्लेषक के रूप में अपनी पहचान बना रही हैं।

इनपुट: IANS

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News4Social स्पोर्ट्स डेस्क

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