सोमवार, 2 नवम्बर 2026 · नई दिल्ली
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U-23 कुश्ती विश्व चैंपियनशिप: विश्वजीत मोरे ने रचा इतिहास, करीबी मुकाबले में गोल्ड से चूके

भारतीय पहलवान विश्वजीत रामचंद्र मोरे ने अंडर-23 विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में इतिहास रच दिया है। गुरुवार को लास वेगास में हुए 55 किलोग्राम भार वर्ग के ग्रीको-रोमन फाइनल में वे जॉर्जिया के कोबा…

U-23 कुश्ती विश्व चैंपियनशिप: विश्वजीत मोरे ने रचा इतिहास, करीबी मुकाबले में गोल्ड से चूके
(फोटो: IANS)

भारतीय पहलवान विश्वजीत रामचंद्र मोरे ने अंडर-23 विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में इतिहास रच दिया है। गुरुवार को लास वेगास में हुए 55 किलोग्राम भार वर्ग के ग्रीको-रोमन फाइनल में वे जॉर्जिया के कोबा कारुमिद्जे से बेहद करीबी मुकाबले में 12-13 से हार गए और उन्हें रजत पदक से संतोष करना पड़ा। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, इस ऐतिहासिक सिल्वर मेडल के साथ विश्वजीत इस प्रतिष्ठित चैंपियनशिप की ग्रीको-रोमन स्पर्धा में रजत पदक जीतने वाले पहले भारतीय पहलवान बन गए हैं।

यह विश्वजीत का अंडर-23 विश्व स्तर पर दूसरा पदक है, इससे पहले वे कांस्य पदक जीत चुके थे। इस उपलब्धि के साथ वे इस चैंपियनशिप में दो पदक जीतने वाले भारत के एकमात्र ग्रीको-रोमन पहलवान भी हैं। मंगलवार को फाइनल में पहुँचकर उन्होंने पहले ही एक कीर्तिमान स्थापित कर दिया था, जब वे इस टूर्नामेंट के खिताबी मुकाबले में जगह बनाने वाले पहले भारतीय ग्रीको-रोमन पहलवान बने।

फाइनल तक का रोमांचक सफर

फाइनल तक की राह में विश्वजीत ने शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने अपने अभियान की शुरुआत मेक्सिको के इसाक मारिन माटा को 10-8 से हराकर की। इसके बाद क्वार्टर फाइनल में उनका सामना ईरान के अंडर-20 विश्व चैंपियन आर्मिन शमसीपौर से हुआ। कंधे की चोट से जूझ रहे शमसीपौर के खिलाफ विश्वजीत ने एक 'फोर-पॉइंटर थ्रो' का इस्तेमाल करते हुए 8-1 से शानदार जीत दर्ज की। रूस के मलिक गिगिएव के खिलाफ सेमीफाइनल मुकाबला भी बेहद रोमांचक रहा, जिसे विश्वजीत ने अंततः 6-4 से अपने नाम किया।

वीजा विवाद और पदकों का नुकसान

हालांकि, भारत के अभियान पर एक प्रशासनिक विवाद का साया भी पड़ा। समाचार एजेंसी के हवाले से कुश्ती महासंघ (WFI) के प्रमुख संजय सिंह ने बताया कि नौ भारतीय पहलवानों को अमेरिकी दूतावास ने वीजा देने से इनकार कर दिया था। उन्होंने कहा, "अमेरिकी दूतावास ने नौ भारतीय पहलवानों के वीजा इस आधार पर खारिज कर दिए कि वे बेरोजगार हैं। इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है... वीजा खारिज होना पूरी तरह से अमेरिकी दूतावास की गलती है, और इसके परिणामस्वरूप भारत को गोल्ड मेडल गंवाने पड़े।" सिंह ने दावा किया कि जिन पहलवानों को वीजा नहीं मिला, उनमें से कम से कम दो स्वर्ण पदक के प्रबल दावेदार थे।

इनपुट: IANS

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News4Social स्पोर्ट्स डेस्क

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