तमिलनाडु के एक छोटे से गांव से निकलकर एशियन गेम्स के पोडियम तक का सफर तय करने वाली बारानिका इलांगोवन की कहानी प्रेरणा और दृढ़ संकल्प की मिसाल है। शुक्रवार को नागोया में ह…
समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, 24 वर्षीय बारानिका ने जब इस जोखिम भरे खेल को चुना, तो उनके माता-पिता को भी कई बातें सुननी पड़ीं। लेकिन उन्होंने और उनके कोच ने बारानिका की क…
“कोई शादी नहीं करेगा”: जब समाज ने उठाए सवाल
बारानिका ने पदक जीतने के बाद IANS को बताया, "मैं एक गांव से आती हूं। जब मैंने शुरुआत की, तो 2019 में वॉल्टिंग के दौरान चोट लगने के बाद मेरी एसीएल सर्जरी हुई थी। उस समय हर…
उन्होंने आगे कहा, "वे हमारी पीठ पीछे बातें कर रहे थे मगर मेरे मम्मी-पापा को मुझ पर भरोसा था। मेरे कोच ने उनसे कहा, 'वह आपकी सोच से कहीं ज्यादा कर दिखाएगी। वह निश्चित रूप…
दिलचस्प बात यह है कि बारानिका को तुरंत पता ही नहीं चला कि उन्होंने मेडल जीत लिया है। कजाकिस्तान की एक एथलीट के साथ तीसरे स्थान पर टाई होने के कारण उन्हें कुछ भ्रम हुआ। उन…
पूरी खबर News4Social पर पढ़ें