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खेतों से कॉमनवेल्थ गेम्स के पोडियम तक: वेटलिफ्टर हरजिंदर कौर के संघर्ष और सफलता की कहानी

(फोटो: IANS)

पंजाब के पटियाला जिले के एक किसान परिवार में जन्मीं हरजिंदर कौर आज भारतीय महिला वेटलिफ्टिंग का एक जाना-पहचाना नाम बन चुकी हैं। उन्होंने लगातार दो कॉमनवेल्थ गेम्स में पदक…

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दिलचस्प बात यह है कि वेटलिफ्टिंग हरजिंदर का पहला प्यार नहीं था। शुरुआत में वह कबड्डी खेलती थीं और इसके प्रशिक्षण के लिए हर दिन 5 किलोमीटर साइकिल चलाकर सेंटर जाती थीं। हाल…

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हरजिंदर ने वेटलिफ्टिंग की दुनिया में काफी देर से, साल 2016 में कदम रखा। उस वक्त वह पटियाला की पंजाबी यूनिवर्सिटी में पढ़ाई कर रही थीं। एक बार खेल में आने के बाद उन्होंने…

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उन्होंने 2021 में ताशकंद में हुई कॉमनवेल्थ वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप में महिलाओं के 71 किलोग्राम वर्ग में रजत पदक अपने नाम किया। इसके ठीक एक साल बाद, 2022 में बर्मिंघम कॉमनव…

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एशियाई खेलों में निराशा और भविष्य की प्रेरणा

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हालांकि, हर सफर में उतार-चढ़ाव आते हैं। हरजिंदर एशियन गेम्स 2026 में भारतीय दल का हिस्सा थीं, लेकिन जापान के आइची-नागोया में वह पदक जीतने से चूक गईं और 69 किलोग्राम भारवर…

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