ओटीटी प्लेटफॉर्म के आने से फिल्में देखने का तरीका बदल गया है, लेकिन इसका असर पूरे देश में एक जैसा नहीं है। जहां उत्तर भारत के कई शहरों में सिनेमाघरों में दर्शकों की संख्य…
समाचार एजेंसी IANS से मिली जानकारी के अनुसार, ट्रेड एनालिस्ट गिरीश वानखेड़े ने दक्षिण और उत्तर के बीच सबसे बड़े अंतर को रेखांकित किया। उन्होंने बताया, "साउथ और हमारे बीच…
बिहार के पूर्णिया में चौथी पीढ़ी के थिएटर मालिक और इंडस्ट्री एक्सपर्ट विशेक चौहान का कहना है कि मामला सिर्फ टिकट के दाम का नहीं है। उन्होंने बताया कि एग्जीबिशन सेक्टर में…
चौहान ने दिल्ली और चेन्नई का उदाहरण देते हुए कहा, "दिल्ली में आपको 700 रुपए में टिकट बेचनी पड़ती है और वही चेन्नई में 190 रुपए में टिकट बिकती है।" उन्होंने यह भी जोड़ा कि…
एक और महत्वपूर्ण पहलू फिल्मों के विकल्पों का है। विशेक चौहान के मुताबिक, उत्तर भारत के दर्शक मुख्य रूप से हिंदी फिल्मों पर निर्भर हैं। इसके विपरीत, दक्षिण के राज्यों में…
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