हिमाचल प्रदेश की मनमोहक घाटी में स्थित कुल्लू का ऐतिहासिक ढालपुर मैदान एक बार फिर आस्था और संस्कृति के अनूठे संगम का गवाह बन रहा है। बुधवार से यहाँ सात दिवसीय अंतर्राष्ट्…
यह उत्सव देश के अन्य दशहरा समारोहों से बिल्कुल अलग है। यहाँ बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक रावण, कुंभकरण या मेघनाद के पुतले नहीं जलाए जाते। इसके बजाय, यह पर्व देवी-देवत…
कुल्लू दशहरा की यह अनूठी परंपरा 17वीं शताब्दी में राजा जगत सिंह के समय शुरू हुई थी, जब उन्होंने भगवान रघुनाथ की प्रतिमा को अपनी राजगद्दी पर स्थापित किया था। तभी से यह उत्…
दानवेंद्र सिंह ने आगे कहा, "गाँव में रघुनाथ जी को ठाकुर जी बोलते हैं क्योंकि विष्णु भगवान भी ठाकुर के रूप में माने जाते हैं।" इस उत्सव के दौरान ढालपुर के कला केंद्र में ह…
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