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तिरंगे के पीछे की कहानी: जब एक भारतीय सैनिक के मन में जागा राष्ट्रध्वज का विचार

(फोटो: IANS)

भारत की स्वतंत्रता और गौरव का प्रतीक तिरंगा सिर्फ तीन रंगों का संगम नहीं, बल्कि इसके पीछे एक गहरा संकल्प और राष्ट्रप्रेम की भावना छिपी है। इस ध्वज को मूर्त रूप देने का श्…

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पिंगली वेंकैया दक्षिण अफ्रीका में एंग्लो-बोअर युद्ध में शामिल हुए थे, जहाँ वे पहली बार गांधीजी के संपर्क में आए और उनकी विचारधारा से गहरे प्रभावित हुए। युद्ध के दौरान जब…

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भारत लौटकर 1906 में हुए एआईसीसी के अधिवेशन में उन्होंने अपना ध्वज बनाने की इच्छा प्रकट की। उन्होंने महात्मा गांधी से भी यह सुझाव साझा किया, जिन्हें यह विचार बेहद पसंद आया…

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कई बदलावों और विचार-विमर्श के बाद, वेंकैया द्वारा डिजाइन किए गए ध्वज ने 1921 में अपना प्रारंभिक स्वरूप लिया। उस वक्त इसमें तीन पट्टियाँ विभिन्न समुदायों का प्रतिनिधित्व क…

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ध्वज में अंतिम परिवर्तन 1931 में हुए, जब रंगों को अंतिम रूप दिया गया। इसमें केसरिया रंग साहस, सफेद रंग शांति और हरा रंग उर्वरता व विकास का प्रतीक बना। चरखे की जगह अशोक चक…

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