भारतीय शास्त्रीय संगीत के आसमान में पंडित बसवराज राजगुरु एक ऐसे सितारे के तौर पर याद किए जाते हैं, जिनकी गायकी में किराना, ग्वालियर और पटियाला घरानों की परंपराओं का अनूठा…
24 अगस्त 1917 को कर्नाटक के धारवाड़ जिले के यालीवाल गांव में जन्मे बसवराज को संगीत विरासत में मिला था। उनके पिता तंजावुर परंपरा के कर्नाटक संगीत के विद्वान थे, जिससे बचपन…
गुरु पंचाक्षरी गवई के सानिध्य में उनकी संगीत शिक्षा बेहद कठोर थी। उन्हें हर दिन 12 से 15 घंटे तक रियाज करना पड़ता था। इस तपस्या का ही नतीजा था कि 1936 में हम्पी में विजयन…
कराची में संगीत की तालीम लेते समय ही 1947 में देश का विभाजन हो गया। उनके उस्ताद लतीफ खान ने उन्हें हिंदुओं से भरी एक ट्रेन में बैठाकर भारत के लिए रवाना किया। लेकिन सीमा क…
पंडित बसवराज राजगुरु की प्रतिभा सिर्फ खयाल गायकी तक सीमित नहीं थी, वह ध्रुपद-धमार, ठुमरी, गजल, नाट्यगीत और वचन गायकी में भी माहिर थे। संगीत में उनके अतुलनीय योगदान के लिए…
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