बचपन में अकेलेपन को दूर करने के लिए शुरू किया गया एक खेल कैसे देश के लिए पदक जीतने का ज़रिया बन सकता है, इसकी मिसाल हैं भारतीय जूडोका तूलिका मान। दिल्ली में 9 सितंबर 1998…
समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, तूलिका का बचपन आसान नहीं था। पिता के निधन के बाद उनकी माँ अमृता मान ने अकेले ही उनका पालन-पोषण किया। माँ के नौकरी पर जाने के बाद तूलिका को घ…
तूलिका ने राज्य स्तर की प्रतियोगिताओं में दमदार प्रदर्शन के बाद राष्ट्रीय स्तर पर रजत पदक जीतकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। 78+ किग्रा वर्ग में खेलने वाली तूलिका ने अंतर…
उनकी सफलताओं का सिलसिला यहीं नहीं रुका। 2019 में काठमांडू में हुए दक्षिण एशियाई खेलों में उन्होंने स्वर्ण पदक जीता। हालांकि, उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि 2022 में बर्मिंघम कॉमन…
तूलिका की यह कामयाबी उस दौर में आई है जब जूडो में भारतीय खिलाड़ियों की उपस्थिति अंतरराष्ट्रीय मंचों पर मज़बूत हो रही है। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत ने जूडो में 2 स्वर्…
कड़ी मेहनत, त्याग और समर्पण के दम पर तूलिका मान आज देश की उन तमाम युवा लड़कियों के लिए एक प्रेरणास्रोत बन चुकी हैं, जो खेल के क्षेत्र में अपना भविष्य बनाना चाहती हैं।
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