ताइपे ओपन: 17 साल की तन्वी शर्मा ने रचा इतिहास, साइना नेहवाल के बाद यह खिताब जीतने वाली दूसरी भारतीय बनीं
भारत की युवा बैडमिंटन सनसनी तन्वी शर्मा ने ताइपे ओपन का खिताब जीतकर इतिहास रच दिया है। रविवार को हुए महिला सिंगल्स फाइनल में 17 वर्षीय तन्वी ने वियतनाम की छठी वरीयता प्राप्त गुयेन थुई लिन्ह को सीधे…
भारत की युवा बैडमिंटन सनसनी तन्वी शर्मा ने ताइपे ओपन का खिताब जीतकर इतिहास रच दिया है। रविवार को हुए महिला सिंगल्स फाइनल में 17 वर्षीय तन्वी ने वियतनाम की छठी वरीयता प्राप्त गुयेन थुई लिन्ह को सीधे गेमों में हराकर अपना पहला बीडब्ल्यूएफ वर्ल्ड टूर सुपर 300 टाइटल जीता। इस जीत के साथ, वह साइना नेहवाल (2008) के बाद यह प्रतिष्ठित टूर्नामेंट जीतने वाली दूसरी भारतीय महिला शटलर बन गई हैं।
समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, यह जीत कई मायनों में ऐतिहासिक है। तन्वी इस खिताब को किसी भी कैटेगरी में जीतने वाली सबसे कम उम्र की खिलाड़ी हैं। इसके अलावा, भारत ने 17 साल बाद इस टूर्नामेंट में कोई खिताब जीता है। इससे पहले 2009 में ज्वाला गुट्टा और वी. दिजू की मिक्स्ड डबल्स जोड़ी ने ग्रां प्री गोल्ड दौर में जीत हासिल की थी। यह इस टूर्नामेंट में भारत की कुल तीसरी जीत है।
शानदार प्रदर्शन से जीता फाइनल
फाइनल मुकाबले में तन्वी ने शुरू से ही आक्रामक खेल दिखाया। पहले गेम में उन्होंने तेजी से 10-2 की बड़ी बढ़त बना ली। हालांकि गुयेन ने वापसी की कोशिश करते हुए स्कोर को 10-8 तक पहुंचाया, लेकिन भारतीय खिलाड़ी ने अपना दबदबा बनाए रखा और गेम 21-16 से अपने नाम कर लिया। दूसरे गेम की शुरुआत में 0-3 से पिछड़ने के बाद भी तन्वी ने जोरदार वापसी की और सात अंकों की बढ़त हासिल कर ली। सिर्फ 36 मिनट तक चले इस मुकाबले को उन्होंने बेहतरीन क्रॉस-कोर्ट शॉट्स और सटीक प्लेसमेंट के दम पर 21-16 से जीतकर अपने नाम किया।
एलीट क्लब में शामिल हुईं तन्वी
इस जीत ने तन्वी को भारतीय बैडमिंटन के एक खास क्लब में पहुंचा दिया है। वह अब साइना नेहवाल, पीवी सिंधु और देविका सिहाग के बाद सुपर 300 या उससे ऊंचे स्तर का खिताब जीतने वाली चौथी भारतीय महिला सिंगल्स खिलाड़ी बन गई हैं। अपनी जीत पर खुशी जाहिर करते हुए तन्वी ने कहा, "यह खिताब जीतकर मैं बहुत खुश हूं। मैंने हर कदम और हर मैच पर ध्यान देते हुए अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने की कोशिश की। मैं थोड़ी घबराई हुई थी, लेकिन मैंने खुद से कहा कि अपना 100 प्रतिशत दूं और अपने खेल पर ध्यान बनाए रखूं।"
इससे पहले, 17 साल और 222 दिन की उम्र में फाइनल में पहुंचकर तन्वी टूर्नामेंट के इतिहास की सबसे कम उम्र की फाइनलिस्ट भी बनी थीं। उन्होंने कोरियाई दिग्गज ली योंग डे का 2006 में बनाया गया रिकॉर्ड तोड़ा। यह उनके युवा करियर का दूसरा बीडब्ल्यूएफ वर्ल्ड टूर फाइनल था।
इनपुट: IANS


