रविवार, 30 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
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आरती साहा: भारत की वो तैराक जिसने 11 की उम्र में ओलंपिक और 19 में इंग्लिश चैनल पार किया

भारतीय तैराकी के इतिहास में कुछ नाम हमेशा के लिए दर्ज हैं, और उनमें से एक प्रमुख नाम आरती साहा का है। उन्होंने छोटी उम्र में ही वो कारनामे कर दिखाए जो आज भी तैराकों के लिए प्रेरणा हैं। कोलकाता में 24…

आरती साहा: भारत की वो तैराक जिसने 11 की उम्र में ओलंपिक और 19 में इंग्लिश चैनल पार किया
(फोटो: IANS)

भारतीय तैराकी के इतिहास में कुछ नाम हमेशा के लिए दर्ज हैं, और उनमें से एक प्रमुख नाम आरती साहा का है। उन्होंने छोटी उम्र में ही वो कारनामे कर दिखाए जो आज भी तैराकों के लिए प्रेरणा हैं। कोलकाता में 24 सितंबर 1940 को जन्मी आरती ने महज़ 4 साल की उम्र से पानी में अपनी प्रतिभा दिखानी शुरू कर दी थी और 5 साल की होते-होते अपना पहला तैराकी मुक़ाबला भी जीत लिया था।

समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, आरती साहा को तैराकी की बारीकियां सिखाने वाले कोच मशहूर ओलंपियन और एशियन गेम्स चैंपियन सचिन नाग थे। उनकी ट्रेनिंग का ही नतीजा था कि आरती ने 1951 में 100 मीटर ब्रेस्टस्ट्रोक में राष्ट्रीय रिकॉर्ड बना डाला। इस शानदार प्रदर्शन ने उनके लिए ओलंपिक के दरवाज़े खोल दिए।

सबसे युवा भारतीय ओलंपियन का रिकॉर्ड

साल 1952 में जब आरती साहा ने ओलंपिक के लिए भारतीय दल में जगह बनाई, तो उनकी उम्र सिर्फ़ 11 साल 10 महीने थी। इस भागीदारी के साथ ही उन्होंने इतिहास रच दिया और ओलंपिक में हिस्सा लेने वाली सबसे कम उम्र की भारतीय एथलीट बन गईं। हेलसिंकी ओलंपिक में उन्होंने महिलाओं की 200 मीटर ब्रेस्टस्ट्रोक हीट में हिस्सा लिया और 3 मिनट 40.8 सेकंड के समय के साथ छठे स्थान पर रहीं। हालांकि, वह सेमीफ़ाइनल के लिए क्वालिफ़ाई नहीं कर सकीं, लेकिन इतनी कम उम्र में उनकी मौजूदगी एक बड़ी उपलब्धि थी।

इंग्लिश चैनल जीतने वाली पहली एशियाई महिला

आरती साहा की उपलब्धियों का सफ़र यहीं नहीं रुका। उन्होंने 19 साल की उम्र में इंग्लिश चैनल को तैरकर पार करने का बड़ा कीर्तिमान स्थापित किया। ऐसा करने वाली वह पहली एशियाई महिला एथलीट बनीं। अगस्त 1959 में अपनी पहली कोशिश में असफल रहने के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी। 29 सितंबर 1959 को अपने दूसरे प्रयास में, उन्होंने 16 घंटे 20 मिनट तक लगातार तैरते हुए 42 मील की दूरी तय की और इंग्लिश चैनल पर विजय प्राप्त की।

पद्मश्री और अन्य सम्मान

खेलों में उनके असाधारण योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें 1960 में 'पद्मश्री' से सम्मानित किया। वह यह प्रतिष्ठित सम्मान पाने वाली पहली भारतीय महिला खिलाड़ी थीं। 23 अगस्त 1994 को आरती साहा का निधन हो गया। उनकी स्मृति को सम्मान देने के लिए सरकार ने 1998 में एक डाक टिकट भी जारी किया।

इनपुट: IANS

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News4Social स्पोर्ट्स डेस्क

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