रविवार, 30 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
अन्य खेल

एशियाई खेलों में पदक जीतने तक घर नहीं लौटेंगी मीराबाई चानू, जानें क्या है उनका संकल्प

भारत की दिग्गज वेटलिफ्टर साइखोम मीराबाई चानू ने 2026 में जापान के आइची-नागोया में होने वाले एशियाई खेलों के लिए एक कड़ा संकल्प लिया है। उन्होंने खुद को चुनौती दी है कि जब तक वह एशियन गेम्स में पदक…

एशियाई खेलों में पदक जीतने तक घर नहीं लौटेंगी मीराबाई चानू, जानें क्या है उनका संकल्प
(फोटो: IANS)

भारत की दिग्गज वेटलिफ्टर साइखोम मीराबाई चानू ने 2026 में जापान के आइची-नागोया में होने वाले एशियाई खेलों के लिए एक कड़ा संकल्प लिया है। उन्होंने खुद को चुनौती दी है कि जब तक वह एशियन गेम्स में पदक नहीं जीत लेतीं, तब तक अपने घर मणिपुर नहीं जाएंगी। समाचार एजेंसी IANS से बात करते हुए उन्होंने कहा, "मैंने खुद को एक चुनौती दी है कि जब तक मैं एशियन गेम्स में पदक नहीं जीत लेती, घर नहीं जाऊंगी।"

मीराबाई के लिए एशियाई खेल हमेशा से एक बड़ी चुनौती रहे हैं। हांगझोउ में हुए पिछले संस्करण में वह 49 किलोग्राम वर्ग में चौथे स्थान पर रही थीं, जबकि 2018 के जकार्ता खेलों से उन्हें पीठ की गंभीर चोट के कारण बाहर होना पड़ा था। वह मानती हैं कि एशियाई खेलों में प्रतिस्पर्धा का स्तर बहुत ऊंचा होता है। उन्होंने कहा, "आप शायद इस बार एशियन गेम्स में 'ओलंपिक' देखेंगे क्योंकि हमारी वेट कैटेगरी में सबसे मजबूत लिफ्टर एशिया से हैं।" उन्हें चीन, उत्तर कोरिया, जापान और थाईलैंड के भारोत्तोलकों से सबसे कड़े मुकाबले की उम्मीद है।

चोट से बचाव और विदेशी कोच की मदद

मीराबाई की पहली प्राथमिकता चोट से मुक्त रहना है, जिसके लिए वह अमेरिकी स्ट्रेंथ और कंडीशनिंग कोच डॉ. एरॉन हॉर्शिग के साथ मिलकर काम कर रही हैं। नवंबर 2020 से जारी इस जुड़ाव के तहत वह हर गुरुवार को वीडियो कॉल पर अपने प्रशिक्षण और रिकवरी की बारीकी से समीक्षा करती हैं। उनके मुख्य कोच विजय शर्मा हैं। मीराबाई ने बताया, "डॉ. हॉर्शिग खुद एक वेटलिफ्टर थे, इसलिए उन्हें शरीर की हर मसल के बारे में पता है।"

कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण पदक की हैट्रिक लगाने के बावजूद, मीराबाई वहां की प्रतिस्पर्धा को ज्यादा अहमियत नहीं दे रही हैं। उनका मानना है कि असली परीक्षा तो अब आनी बाकी है। ग्लासगो में स्वर्ण पदक जीतने के बाद भी उन्होंने एक दिन बर्बाद नहीं किया और सीधे मोदीनगर में ट्रेनिंग के लिए लौट आईं। उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 205 किलोग्राम (89 + 116 किग्रा) है। वह कहती हैं, "मैं देखना चाहती हूं कि मैं जापान में कितना आगे जा सकती हूं।"

पेरिस ओलंपिक और भविष्य की योजनाएं

2024 के पेरिस ओलंपिक में मीराबाई सिर्फ एक किलोग्राम के अंतर से चौथे स्थान पर रह गई थीं। एशियाई खेलों में उनका प्रदर्शन भविष्य की योजनाओं के लिए भी महत्वपूर्ण होगा, खासकर लॉस एंजिल्स ओलंपिक के लिए, जहां उनकी वेट कैटेगरी 53 किग्रा होगी। उन्होंने कहा, "सब कुछ नागोया में प्रदर्शन पर निर्भर करेगा और फिर हम दिसंबर में ओलंपिक क्वालीफायर के साथ प्लान बना सकते हैं।" फिलहाल उनका पूरा ध्यान सिर्फ एशियाई खेलों पर है, जहां वह पांच सदस्यों वाले भारतीय दल का नेतृत्व करेंगी। यह आयोजन 19 सितंबर से 4 अक्टूबर तक होना है।

इनपुट: IANS

N

News4Social स्पोर्ट्स डेस्क

News4Social स्पोर्ट्स डेस्क — IANS समेत लाइसेंस-प्राप्त समाचार एजेंसियों की फीड से खेल जगत से जुड़ी ताज़ा व प्रामाणिक खबरें संपादकीय समीक्षा के बाद प्रकाशित करता है। हर खबर उसके स्रोत के श्रेय (credit) के साथ दी जाती है। सभी लेख देखें →

आगे पढ़ें

और देखें →